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Himachal News: रूढ़ियों को तोड़ते हुए सास-ससुर ने किया विधवा बहू का कन्यादान, देवरों ने निभाई भाई की भूमिका

Sun, 12 Jul 2026 09:47 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शाहपुर (कांगड़ा)।
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहपुर (कांगड़ा)। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 12 Jul 2026 09:47 AM IST
सार

कांगड़ा के शाहपुर के चंमडेरा गांव में एक परिवार ने सामाजिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। बेटे की सड़क हादसे में मौत के करीब डेढ़ साल बाद सास-ससुर ने अपनी विधवा बहू रंजना का पुनर्विवाह कराते हुए स्वयं कन्यादान किया, जबकि देवरों ने भाई बनकर सम्मानपूर्वक विदाई दी। परिवार के इस कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। विस्तार से पढ़ें...

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kangra shahpur in laws perform kanyadaan of widowed daughter in law devars give farewell
बहू रंजना का कन्यादान करती सास। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के शाहपुर में चंमडेरा गांव के एक परिवार ने समाज के सामने संवेदनशीलता और मानवीय रिश्तों की एक अनूठी मिसाल पेश की है। यहां एक सास-ससुर ने अपनी विधवा बहू रंजना को बेटी का दर्जा देते हुए न केवल उसका कन्यादान किया, बल्कि उसके नए जीवन की शुरुआत में एक मिसाल कायम की। वहीं, बहू के देवरों ने भाई का फर्ज निभाते हुए उसे आदर-सम्मान के साथ विदा किया। इस परिवार के इस कदम की हर कोई सराहना कर रहा है और इसे बदलते समय में रिश्तों की नई परिभाषा के तौर पर देखा जा रहा है।

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बेटी की तरह पाला, फिर तय किया पुनर्विवाह
यह हृदयस्पर्शी घटना तब घटी जब करीब डेढ़ साल पहले रंजना के पति राजिंद्र कुमार की एक सड़क हादसे में दुखद मृत्यु हो गई थी। पति को खोने के बाद रंजना के जीवन में अंधेरा छा गया था। ऐसे कठिन समय में, रंजना के ससुर ईश्वर दास और सास विमला देवी ने अपनी बहू को अकेला नहीं छोड़ा। उन्होंने उसे अपनी बेटी की तरह रखा और उसके भविष्य को सुरक्षित और खुशहाल बनाने का संकल्प लिया। समाज की रूढ़िवादी सोच और परंपराओं की बेड़ियों को तोड़ते हुए, उन्होंने रंजना के पुनर्विवाह का निर्णय लिया।
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परंपराओं को तोड़कर निभाया माता-पिता का फर्ज
ईश्वर दास और विमला देवी ने सामाजिक मान्यताओं से ऊपर उठकर अपनी बहू के पुनर्विवाह की सभी व्यवस्थाएं कीं। उन्होंने न केवल माता-पिता का फर्ज निभाते हुए स्वयं उसका कन्यादान किया, बल्कि एक नई मिसाल भी पेश की। दो दिन पहले मंदिर में रंजना का विवाह संपन्न हुआ। इस पुनीत कार्य में परिवार के अन्य सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और रिश्तों की नई परिभाषा को साकार किया।

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देवरों ने निभाया भाई का दायित्व
रंजना के देवरों, इंद्र कुमार और सुरेंद्र पाल ने भी इस अवसर पर अपने भाई का फर्ज बखूबी निभाया। उन्होंने विवाह की सभी व्यवस्थाओं की कमान संभाली और अपनी भाभी को नए वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए घरेलू सामान भेंट किया। इस भावुक क्षण में, जब रंजना को डोली में बिठाया गया, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। यह दृश्य रिश्तों के महत्व और अपनत्व को दर्शाता है।

अपनत्व और विश्वास से निभाए जाते हैं रिश्ते
इस परिवार ने साबित कर दिया है कि रिश्ते केवल खून के नहीं होते, बल्कि वे अपनत्व, सम्मान और आपसी विश्वास से भी निभाए जाते हैं। बदलते दौर में, जहां कई बार पारिवारिक रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं, वहीं शाहपुर के इस परिवार ने एक सकारात्मक संदेश दिया है कि मुश्किल समय में एक-दूसरे का सहारा बनकर और मानवीय मूल्यों को अपनाकर हम समाज को बेहतर बना सकते हैं। यह घटना उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो रूढ़ियों में जकड़े हुए हैं और मानवीय संवेदनाओं को भूल जाते हैं।
 
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