{"_id":"6a0e14591573bdcb540d66df","slug":"medical-stores-across-the-district-closed-in-protest-against-online-drug-sales-hospitals-thronged-kangra-news-c-95-1-kng1045-235538-2026-05-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद, अस्पतालों में उमड़ी भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद, अस्पतालों में उमड़ी भीड़
विज्ञापन
धर्मशाला अस्पताल में बुधावर को डिस्पेंसरी में दवाईयां लेने के लिए उमड़ी भीड़। अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
धर्मशाला। ऑनलाइन दवाओं की अवैध एवं अनियंत्रित बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर बुधवार को जिला कांगड़ा में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। जिलेभर में सभी निजी मेडिकल स्टोर पूरे दिन पूरी तरह बंद रहे। इस हड़ताल के चलते गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों, बुजुर्गों और दूरदराज से आए तीमारदारों को दवाइयों के लिए दर-दर भटकना पड़ा।
बुधवार को क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में ओपीडी 600 से अधिक रही। इस दौरान डॉक्टरों से जांच करवाने के बाद जब मरीज सरकारी डिस्पेंसरी पहुंचे तो वहां केवल नाममात्र दवाएं ही मिल पाईं। इसके बाद सिविल सप्लाई की एकमात्र खुली दुकान पर दवाइयों के लिए मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां लोगों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी कई आवश्यक दवाइयां स्टॉक में नहीं मिलीं, जिससे तीमारदारों में भारी चिंता का माहौल रहा। कुछ लोगों ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सीमित दवाइयां उपलब्ध थीं और कई जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। बाजार में मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण उन्हें बाहर से भी दवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। कुल मिलाकर हड़ताल के चलते अस्पतालों के आसपास भी सन्नाटा पसरा रहा।
विज्ञापन
मरीज और तीमारदार बोले- नहीं मिली कई दवाएं
चेकअप के बाद डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखी थीं, लेकिन सरकारी डिस्पेंसरी से केवल तीन ही मिलीं। बाकी दो दवाइयां बाहर मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण कहीं नहीं मिल पाईं। -रंजना, खनियारा
अस्पताल की डिस्पेंसरी और सिविल सप्लाई की दुकान दोनों जगह डॉक्टर द्वारा लिखी दवाएं नहीं मिलीं। अब बाजार के सारे मेडिकल स्टोर बंद हैं, समझ नहीं आ रहा दवा कहां से लें। -राकेश कुमार, धर्मशाला
डॉक्टर ने पर्ची पर तीन दवाइयां लिखी थीं, अंदर सिर्फ दो मिलीं। एक दवाई के लिए बाहर पता किया तो दुकानें बंद थीं। अब स्टोर खुलने का इंतजार करना होगा। -अनीता कुमारी, दाड़ी
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला के अंदर हमेशा गिनी-चुनी दवाइयां ही मिलती हैं। डॉक्टर ऐसी दवाएं लिखते हैं जो बाहर मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं, लेकिन आज सब बंद है। -रमन, योल
जिलेभर में भी दिखा व्यापक असर, भटके मरीज
रैहन/रक्कड़/बरियाल (कांगड़ा)। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के विरोध में जिला भर के उपनगरों में भी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। जवाली, रैहन, भरमाड़, रक्कड़ और नगरोटा सूरियां क्षेत्र के सभी मेडिकल स्टोर व रिटेल फार्मेसियों की दुकानें बुधवार को पूरी तरह बंद रहीं। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना दवाइयों पर निर्भर रहने वाले बुजुर्ग मरीजों और उनके परिजनों को जरूरी दवाओं के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकना पड़ा। केमिस्ट एसोसिएशन जवाली के अध्यक्ष सतीश कुमार गुप्ता और खंड नगरोटा सूरियां इकाई के प्रधान राज शहरिया ने कहा कि दवाओं की इस अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री के प्रचलन से जहां दवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्न चिह्न लगा है, वहीं मरीजों की जिंदगी को भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। सरकार इन डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स के लिए भी सख्त नियम और कानूनी दायरा तय करे।
बुधवार को क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में ओपीडी 600 से अधिक रही। इस दौरान डॉक्टरों से जांच करवाने के बाद जब मरीज सरकारी डिस्पेंसरी पहुंचे तो वहां केवल नाममात्र दवाएं ही मिल पाईं। इसके बाद सिविल सप्लाई की एकमात्र खुली दुकान पर दवाइयों के लिए मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां लोगों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी कई आवश्यक दवाइयां स्टॉक में नहीं मिलीं, जिससे तीमारदारों में भारी चिंता का माहौल रहा। कुछ लोगों ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सीमित दवाइयां उपलब्ध थीं और कई जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। बाजार में मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण उन्हें बाहर से भी दवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। कुल मिलाकर हड़ताल के चलते अस्पतालों के आसपास भी सन्नाटा पसरा रहा।
Trending Videos
मरीज और तीमारदार बोले- नहीं मिली कई दवाएं
चेकअप के बाद डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखी थीं, लेकिन सरकारी डिस्पेंसरी से केवल तीन ही मिलीं। बाकी दो दवाइयां बाहर मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण कहीं नहीं मिल पाईं। -रंजना, खनियारा
अस्पताल की डिस्पेंसरी और सिविल सप्लाई की दुकान दोनों जगह डॉक्टर द्वारा लिखी दवाएं नहीं मिलीं। अब बाजार के सारे मेडिकल स्टोर बंद हैं, समझ नहीं आ रहा दवा कहां से लें। -राकेश कुमार, धर्मशाला
डॉक्टर ने पर्ची पर तीन दवाइयां लिखी थीं, अंदर सिर्फ दो मिलीं। एक दवाई के लिए बाहर पता किया तो दुकानें बंद थीं। अब स्टोर खुलने का इंतजार करना होगा। -अनीता कुमारी, दाड़ी
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला के अंदर हमेशा गिनी-चुनी दवाइयां ही मिलती हैं। डॉक्टर ऐसी दवाएं लिखते हैं जो बाहर मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं, लेकिन आज सब बंद है। -रमन, योल
जिलेभर में भी दिखा व्यापक असर, भटके मरीज
रैहन/रक्कड़/बरियाल (कांगड़ा)। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के विरोध में जिला भर के उपनगरों में भी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। जवाली, रैहन, भरमाड़, रक्कड़ और नगरोटा सूरियां क्षेत्र के सभी मेडिकल स्टोर व रिटेल फार्मेसियों की दुकानें बुधवार को पूरी तरह बंद रहीं। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना दवाइयों पर निर्भर रहने वाले बुजुर्ग मरीजों और उनके परिजनों को जरूरी दवाओं के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकना पड़ा। केमिस्ट एसोसिएशन जवाली के अध्यक्ष सतीश कुमार गुप्ता और खंड नगरोटा सूरियां इकाई के प्रधान राज शहरिया ने कहा कि दवाओं की इस अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री के प्रचलन से जहां दवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्न चिह्न लगा है, वहीं मरीजों की जिंदगी को भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। सरकार इन डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स के लिए भी सख्त नियम और कानूनी दायरा तय करे।

धर्मशाला अस्पताल में बुधावर को डिस्पेंसरी में दवाईयां लेने के लिए उमड़ी भीड़। अमर उजाला

धर्मशाला अस्पताल में बुधावर को डिस्पेंसरी में दवाईयां लेने के लिए उमड़ी भीड़। अमर उजाला

धर्मशाला अस्पताल में बुधावर को डिस्पेंसरी में दवाईयां लेने के लिए उमड़ी भीड़। अमर उजाला

धर्मशाला अस्पताल में बुधावर को डिस्पेंसरी में दवाईयां लेने के लिए उमड़ी भीड़। अमर उजाला