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Kangra News: सीयू में नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू, रोजगार के मिलेंगे बेहतर मौके
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धर्मशाला। केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश (सीयूएचपी) ने नए शैक्षणिक सत्र से रोजगार और राष्ट्रीय जरूरतों से जुड़े कई नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप की गई है, ताकि विद्यार्थियों को कौशल आधारित और बहु-विषयक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। इन पाठ्यक्रमों से देश-विदेश में रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
विश्वविद्यालय में इस सत्र से एलएलएम पाठ्यक्रम शुरू कर दिया गया है, जिसे विद्यार्थियों का अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला है। वहीं बीकॉम एलएलबी और बीबीए एलएलबी पाठ्यक्रम बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से अंतिम मंजूरी मिलते ही शुरू कर दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, विधि शिक्षा को समाज से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय में लीगल एड क्लिनिक भी स्थापित किया जाएगा।
इसके माध्यम से स्थानीय समुदाय और विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के लोगों को कानूनी जागरूकता, अधिकारों की जानकारी और प्रारंभिक कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रो. बंसल ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों और बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए चीनी भाषा का नया पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
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वहीं, धर्मशाला की अंतरराष्ट्रीय पहचान को ध्यान में रखते हुए बौद्ध एवं तिब्बती अध्ययन भी पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं, जिससे शोध और बौद्ध पर्यटन को नई गति मिलेगी। हिमाचल की भौगोलिक आवश्यकताओं के अनुरूप भू-विज्ञान (जियोलॉजी) तथा जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग के पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। ये विषय आपदा प्रबंधन, भूस्खलन अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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विश्वविद्यालय में इस सत्र से एलएलएम पाठ्यक्रम शुरू कर दिया गया है, जिसे विद्यार्थियों का अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला है। वहीं बीकॉम एलएलबी और बीबीए एलएलबी पाठ्यक्रम बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से अंतिम मंजूरी मिलते ही शुरू कर दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, विधि शिक्षा को समाज से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय में लीगल एड क्लिनिक भी स्थापित किया जाएगा।
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इसके माध्यम से स्थानीय समुदाय और विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के लोगों को कानूनी जागरूकता, अधिकारों की जानकारी और प्रारंभिक कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रो. बंसल ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों और बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए चीनी भाषा का नया पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
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वहीं, धर्मशाला की अंतरराष्ट्रीय पहचान को ध्यान में रखते हुए बौद्ध एवं तिब्बती अध्ययन भी पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं, जिससे शोध और बौद्ध पर्यटन को नई गति मिलेगी। हिमाचल की भौगोलिक आवश्यकताओं के अनुरूप भू-विज्ञान (जियोलॉजी) तथा जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग के पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। ये विषय आपदा प्रबंधन, भूस्खलन अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।