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Kangra News: सड़क दुर्घटना में बेटे की मौत पर मां को 42.06 लाख मुआवजा देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 01 May 2026 07:11 AM IST
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धर्मशाला। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण पालमपुर ने सड़क हादसे में युवक की मौत के मामले में उसकी मां को 42.06 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित अदा की जाएगी। दी न्यू इंडिया इंश्यारेंस कंपनी को 45 दिन के भीतर यह राशि शिकायतकर्ता को अदा करने का आदेश दिया है। अधिकरण के अध्यक्ष धीरू ठाकुर की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
जानकारी के अनुसार गमरी देवी निवासी ग्राम कंद्राल, तहसील बैजनाथ ने अपने बेटे अरुण कुमार की मौत के बाद मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत मुआवजे की मांग की थी। उन्होंने बताया था कि उनका बेटा बंगलुरू में एक निजी कंपनी में सीनियर साइट इंजीनियर के तौर पर कार्यरत था। याचिका में बताया था कि कंपनी की तरफ से वह क्रिकेट प्रतियोगिता में भाग लेने गया था और 29 दिसंबर 2019 को आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में एक्सप्रेस-वे पर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण वाहन का टायर फट गया और वह पेड़ से टकराकर पलट गया और अरुण की मौके पर मौत हो गई।
याचिकाकर्ता के अनुसार मृतक परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य था, जो हर महीने घर खर्च के लिए आर्थिक सहायता भेजता था। बेटे की असमय मौत से परिवार को गहरा आर्थिक और मानसिक आघात पहुंचा। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पाया कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई। कोर्ट ने चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त और अलग-अलग रूप से जिम्मेदार ठहराया। बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह 45 दिन के भीतर पूरी मुआवजा राशि ब्याज सहित याचिकाकर्ता के खाते में जमा करे।
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जानकारी के अनुसार गमरी देवी निवासी ग्राम कंद्राल, तहसील बैजनाथ ने अपने बेटे अरुण कुमार की मौत के बाद मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत मुआवजे की मांग की थी। उन्होंने बताया था कि उनका बेटा बंगलुरू में एक निजी कंपनी में सीनियर साइट इंजीनियर के तौर पर कार्यरत था। याचिका में बताया था कि कंपनी की तरफ से वह क्रिकेट प्रतियोगिता में भाग लेने गया था और 29 दिसंबर 2019 को आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में एक्सप्रेस-वे पर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण वाहन का टायर फट गया और वह पेड़ से टकराकर पलट गया और अरुण की मौके पर मौत हो गई।
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याचिकाकर्ता के अनुसार मृतक परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य था, जो हर महीने घर खर्च के लिए आर्थिक सहायता भेजता था। बेटे की असमय मौत से परिवार को गहरा आर्थिक और मानसिक आघात पहुंचा। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पाया कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई। कोर्ट ने चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त और अलग-अलग रूप से जिम्मेदार ठहराया। बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह 45 दिन के भीतर पूरी मुआवजा राशि ब्याज सहित याचिकाकर्ता के खाते में जमा करे।
