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Kangra News: पंजाब के युवक को एक साल का कठोर कारावास, 10 हजार जुर्माना
Wed, 29 Jul 2026 08:12 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 29 Jul 2026 08:12 AM IST
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धर्मशाला। वर्ष 2019 में पालमपुर के बुटेल चौक से कार में 9.56 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद होने के मामले में अदालत ने आरोपी सुनील धीर निवासी छरेटा बाजार (अमृतसर, पंजाब) को दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश-सह-प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय) धर्मशाला डॉ. अरविंद मल्होत्रा की अदालत ने दोषी को एक वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, मामले में शामिल एक अन्य सह-आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार सात नवंबर 2019 को स्पेशल नारकोटिक सेल की टीम ने बुटेल चौक पर नाकाबंदी के दौरान एक कार को चेकिंग के लिए रोका।
तलाशी लेने पर कार के डैशबोर्ड से 9.56 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। जांच के बाद पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जब्ती, सीलिंग, फोरेंसिक रिपोर्ट और साक्ष्यों की श्रृंखला सुनील धीर के खिलाफ पूरी तरह सिद्ध होती है।
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हालांकि, दूसरे युवक के खिलाफ केवल सह-आरोपी के बयान के अलावा कोई स्वतंत्र साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड या कॉल डिटेल उपलब्ध नहीं थी, जिससे उसे बरी कर दिया गया। अदालत ने बरामद मात्रा को मध्यवर्ती श्रेणी और आरोपी का पहला अपराध मानते हुए यह सजा सुनाई।
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जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, मामले में शामिल एक अन्य सह-आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार सात नवंबर 2019 को स्पेशल नारकोटिक सेल की टीम ने बुटेल चौक पर नाकाबंदी के दौरान एक कार को चेकिंग के लिए रोका।
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तलाशी लेने पर कार के डैशबोर्ड से 9.56 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। जांच के बाद पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जब्ती, सीलिंग, फोरेंसिक रिपोर्ट और साक्ष्यों की श्रृंखला सुनील धीर के खिलाफ पूरी तरह सिद्ध होती है।
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हालांकि, दूसरे युवक के खिलाफ केवल सह-आरोपी के बयान के अलावा कोई स्वतंत्र साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड या कॉल डिटेल उपलब्ध नहीं थी, जिससे उसे बरी कर दिया गया। अदालत ने बरामद मात्रा को मध्यवर्ती श्रेणी और आरोपी का पहला अपराध मानते हुए यह सजा सुनाई।