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Kangra News: दुकानदार का 9.41 लाख की वसूली का दावा किया खारिज
Sat, 20 Jun 2026 12:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:54 PM IST
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धर्मशाला। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पालमपुर की अदालत ने क्षेत्र में स्थित गारमेंट्स शोरूम के मालिक की ओर से गुजरात की एक कपड़ा मील के खिलाफ दायर 9.41 लाख रुपये की वसूली संबंधी अपील को खारिज कर दिया है।
अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि वादी अपने दावों को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित करने में असफल रहा है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश धीरू ठाकुर की अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों में लिखित समझौता नहीं था और मौखिक दावों पर वसूली के आदेश नहीं दिए जा सकते हैं।
मामले के अनुसार गारमेंट्स शोरूम के मालिक ने दावा किया था कि उन्होंने गुजरात की नाम कंपनी की फ्रेंचाइजी लेकर वर्ष 2008 में पालमपुर में शोरूम खोला था। कंपनी ने उससे सात लाख रुपये सुरक्षा राशि और 30 हजार रुपये सॉफ्टवेयर शुल्क के रूप में जमा करवाए थे।
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वादी का आरोप था कि कंपनी ने पुराना और खराब गुणवत्ता का माल भेजा, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ। साथ ही सुरक्षा राशि, ब्याज, न्यूनतम मार्जिन गारंटी और अन्य खर्चों के रूप में कुल 9.41 लाख रुपये की वसूली की मांग की गई थी।
निचली अदालत ने वर्ष 2018 में यह दावा खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ शोरूम मालिक ने अपील दायर की थी। अदालत ने अपील खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए।
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अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि वादी अपने दावों को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित करने में असफल रहा है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश धीरू ठाकुर की अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों में लिखित समझौता नहीं था और मौखिक दावों पर वसूली के आदेश नहीं दिए जा सकते हैं।
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मामले के अनुसार गारमेंट्स शोरूम के मालिक ने दावा किया था कि उन्होंने गुजरात की नाम कंपनी की फ्रेंचाइजी लेकर वर्ष 2008 में पालमपुर में शोरूम खोला था। कंपनी ने उससे सात लाख रुपये सुरक्षा राशि और 30 हजार रुपये सॉफ्टवेयर शुल्क के रूप में जमा करवाए थे।
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वादी का आरोप था कि कंपनी ने पुराना और खराब गुणवत्ता का माल भेजा, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ। साथ ही सुरक्षा राशि, ब्याज, न्यूनतम मार्जिन गारंटी और अन्य खर्चों के रूप में कुल 9.41 लाख रुपये की वसूली की मांग की गई थी।
निचली अदालत ने वर्ष 2018 में यह दावा खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ शोरूम मालिक ने अपील दायर की थी। अदालत ने अपील खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए।