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श्रीराम को लाने का दावा करने वालों को ही डुबोएंगे श्रीराम : शोभा ओझा
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धर्मशाला। महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शोभा ओझा ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में करोड़ों रुपये की लूट हुई है। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग किया जाए। मंदिर के चढ़ावे में हुई लूट की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच होनी चाहिए। धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि श्रीराम को लाने का दावा करने वालों को अब श्रीराम डुबोएंगे।
शोभा ओझा ने कहा कि एक समय गजनवी बाहर से आकर मंदिरों को लूटता था, लेकिन अब मंदिर के कर्ता-धर्ता ही इसे लूट रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट द्वारा एसआईटी गठित करने से गुनाहों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होना इस बात का प्रमाण है कि यह मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का है।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय की सक्रिय भूमिका रही है, इसलिए केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि इस ट्रस्ट को ऑटोनॉमस बनाकर आरटीआई के दायरे से बाहर क्यों रखा गया? जब ट्रस्ट के 15 में से 12 सदस्य भाजपा-आरएसएस से थे और उन्हें केंद्र सरकार ने ही नामित किया था तो प्रधानमंत्री मोदी आरोपों की आंच से कैसे बच सकते हैं।
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महिला कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस घोटाले को दर्शाती एक दर्जन इंटेलिजेंस रिपोर्टें पीएम को भेजी गईं, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। उन्होंने कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र हैं। उनके नाम पर जुटाए गए धन की लूट और उस पर पर्दा डालने की कोशिश देश की धार्मिक चेतना का अपमान है।
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शोभा ओझा ने कहा कि एक समय गजनवी बाहर से आकर मंदिरों को लूटता था, लेकिन अब मंदिर के कर्ता-धर्ता ही इसे लूट रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट द्वारा एसआईटी गठित करने से गुनाहों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होना इस बात का प्रमाण है कि यह मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का है।
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उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय की सक्रिय भूमिका रही है, इसलिए केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि इस ट्रस्ट को ऑटोनॉमस बनाकर आरटीआई के दायरे से बाहर क्यों रखा गया? जब ट्रस्ट के 15 में से 12 सदस्य भाजपा-आरएसएस से थे और उन्हें केंद्र सरकार ने ही नामित किया था तो प्रधानमंत्री मोदी आरोपों की आंच से कैसे बच सकते हैं।
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महिला कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस घोटाले को दर्शाती एक दर्जन इंटेलिजेंस रिपोर्टें पीएम को भेजी गईं, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। उन्होंने कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र हैं। उनके नाम पर जुटाए गए धन की लूट और उस पर पर्दा डालने की कोशिश देश की धार्मिक चेतना का अपमान है।