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Kangra News: धौलाधार अभयारण्य में पहली बार दिखा हिम तेंदुआ
Sat, 01 Aug 2026 08:18 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 01 Aug 2026 08:18 AM IST
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धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य के कैमरे में कैद हुआ हिम तेंदुआ। -विभाग
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धर्मशाला। धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार दुर्लभ और विलुप्तप्राय हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड) कैमरा ट्रैप में कैद हुआ है। इसे वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। उप वन संरक्षक रेजिनाल्ड रॉयस्टन ने बताया कि 21 दिसंबर 2025 को समुद्र तल से 2,836 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किए गए कैमरा ट्रैप में हिम तेंदुए की तस्वीर रिकॉर्ड हुई है।
यह सफलता वर्ष 2023 से 2026 के बीच चलाए गए व्यापक कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण का परिणाम है। इस दौरान अभयारण्य के विभिन्न हिस्सों में 117 कैमरे लगाए गए और कुल 4,238 कैमरा-ट्रैप दिवस का गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया गया। सर्दियों के दौरान उच्च पर्वतीय धारों, दर्रों और वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों पर विशेष रूप से कैमरे तैनात किए गए थे।
हिम तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि के साथ ही धौलाधार अभयारण्य पश्चिमी हिमालय के उन चुनिंदा संरक्षित क्षेत्रों में शामिल हो गया है, जहां हिम तेंदुआ, हिमालयी भूरा भालू, एशियाई काला भालू और सामान्य तेंदुआ जैसे चार बड़े शिकारी एक ही इकोसिस्टम में मौजूद हैं। यह खोज साबित करती है कि यह क्षेत्र कुगती, तुंदाह, नरगू और लाहौल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारा (इकोलॉजिकल कॉरिडोर) का काम कर रहा है।
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यह सफलता वर्ष 2023 से 2026 के बीच चलाए गए व्यापक कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण का परिणाम है। इस दौरान अभयारण्य के विभिन्न हिस्सों में 117 कैमरे लगाए गए और कुल 4,238 कैमरा-ट्रैप दिवस का गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया गया। सर्दियों के दौरान उच्च पर्वतीय धारों, दर्रों और वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों पर विशेष रूप से कैमरे तैनात किए गए थे।
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हिम तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि के साथ ही धौलाधार अभयारण्य पश्चिमी हिमालय के उन चुनिंदा संरक्षित क्षेत्रों में शामिल हो गया है, जहां हिम तेंदुआ, हिमालयी भूरा भालू, एशियाई काला भालू और सामान्य तेंदुआ जैसे चार बड़े शिकारी एक ही इकोसिस्टम में मौजूद हैं। यह खोज साबित करती है कि यह क्षेत्र कुगती, तुंदाह, नरगू और लाहौल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारा (इकोलॉजिकल कॉरिडोर) का काम कर रहा है।
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