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Kangra News: स्टार हेल्थ को ब्याज सहित चुकाना होगा 58,729 रुपये का बीमा क्लेम
Thu, 30 Jul 2026 07:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 30 Jul 2026 07:03 AM IST
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धर्मशाला। जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को बीमा धारक का स्वास्थ्य बीमा दावा चुकाने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि मरीज के अस्पताल में भर्ती होने को गैरजरूरी बताकर क्लेम खारिज करना सेवा में कमी है। अदालत ने कंपनी को 58,729 रुपये का बीमा दावा नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए हैंं।
इसके साथ ही पीड़ित को 20 हजार रुपये मुआवजा तथा 15 हजार रुपये वाद व्यय देने के निर्देश दिए हैं। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने गुरदीप सिंह निवासी अपर बड़ोल, धर्मशाला की शिकायत पर यह फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने वर्ष 2021 में फैमिली हेल्थ ऑप्टिमा पॉलिसी ली थी।
अगस्त 2023 में बेटे को तेज बुखार और गले में संक्रमण के कारण निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिस पर 58,729 रुपये खर्च हुए। लेकिन बीमा कंपनी ने यह तर्क देकर क्लेम खारिज कर दिया कि अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक नहीं था। आयोग ने स्पष्ट किया कि मरीज को भर्ती करने का फैसला इलाज करने वाला डॉक्टर करता है, बीमा कंपनी की मेडिकल टीम नहीं। चूंकि डॉक्टर का प्रमाणपत्र और मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध थे और कंपनी कोई ठोस साक्ष्य नहीं दे सकी, इसलिए आयोग ने बीमा कंपनी की दलील को खारिज करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया।
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इसके साथ ही पीड़ित को 20 हजार रुपये मुआवजा तथा 15 हजार रुपये वाद व्यय देने के निर्देश दिए हैं। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने गुरदीप सिंह निवासी अपर बड़ोल, धर्मशाला की शिकायत पर यह फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने वर्ष 2021 में फैमिली हेल्थ ऑप्टिमा पॉलिसी ली थी।
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अगस्त 2023 में बेटे को तेज बुखार और गले में संक्रमण के कारण निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिस पर 58,729 रुपये खर्च हुए। लेकिन बीमा कंपनी ने यह तर्क देकर क्लेम खारिज कर दिया कि अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक नहीं था। आयोग ने स्पष्ट किया कि मरीज को भर्ती करने का फैसला इलाज करने वाला डॉक्टर करता है, बीमा कंपनी की मेडिकल टीम नहीं। चूंकि डॉक्टर का प्रमाणपत्र और मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध थे और कंपनी कोई ठोस साक्ष्य नहीं दे सकी, इसलिए आयोग ने बीमा कंपनी की दलील को खारिज करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया।
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