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Kangra News: एक साल से क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला की कैंटीन पर ताला
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धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्य स्टाफ की सुविधा के लिए बनाई गई कैंटीन एक साल बाद भी बंद पड़ी है। कैंटीन पर ताला लटका होने के कारण अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ-साथ स्टाफ को भी चाय, नाश्ता और भोजन के लिए अस्पताल परिसर से बाहर जाना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि कैंटीन का किराया तय करने के लिए करीब सात माह से री-असेसमेंट की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो सकी है। कैंटीन बंद होने का सबसे अधिक असर उन मरीजों और तीमारदारों पर पड़ रहा है, जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रुकना पड़ता है। खासकर दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भोजन और अन्य जरूरी सामान के लिए अस्पताल से बाहर निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है।
अस्पताल परिसर में कैंटीन की सुविधा होने के बावजूद विभागीय ढिलाई के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल की कैंटीन को दोबारा शुरू करने के लिए किराया तय किया जाना है, जिसके लिए री-असेसमेंट की प्रक्रिया पूरी होनी अनिवार्य है। लेकिन करीब सात माह बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर मामला आगे नहीं बढ़ सका है।
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जुलाई, 2025 में पुराना ठेकेदार अस्पताल प्रशासन का 8.50 लाख रुपये का किराया चुकाए बिना ही रातों-रात भाग गया था। तब से लेकर अभी तक कैंटीन पर ताला लटका हुआ है। क्षेत्रीय अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार और जांच के लिए पहुंचते हैं। कई मरीजों को घंटों अस्पताल में ही रुकना पड़ता है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से लोक निर्माण विभाग को कैंटीन का किराया तय करने के लिए री-असेसमेंट करने को कहा गया है। कुछ दिन पहले विभाग की टीम ने निरीक्षण किया था, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है। इसके बाद ही आगामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - डॉ. अनुराधा शर्मा, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला
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हैरानी की बात यह है कि कैंटीन का किराया तय करने के लिए करीब सात माह से री-असेसमेंट की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो सकी है। कैंटीन बंद होने का सबसे अधिक असर उन मरीजों और तीमारदारों पर पड़ रहा है, जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रुकना पड़ता है। खासकर दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भोजन और अन्य जरूरी सामान के लिए अस्पताल से बाहर निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है।
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अस्पताल परिसर में कैंटीन की सुविधा होने के बावजूद विभागीय ढिलाई के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल की कैंटीन को दोबारा शुरू करने के लिए किराया तय किया जाना है, जिसके लिए री-असेसमेंट की प्रक्रिया पूरी होनी अनिवार्य है। लेकिन करीब सात माह बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर मामला आगे नहीं बढ़ सका है।
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जुलाई, 2025 में पुराना ठेकेदार अस्पताल प्रशासन का 8.50 लाख रुपये का किराया चुकाए बिना ही रातों-रात भाग गया था। तब से लेकर अभी तक कैंटीन पर ताला लटका हुआ है। क्षेत्रीय अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार और जांच के लिए पहुंचते हैं। कई मरीजों को घंटों अस्पताल में ही रुकना पड़ता है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से लोक निर्माण विभाग को कैंटीन का किराया तय करने के लिए री-असेसमेंट करने को कहा गया है। कुछ दिन पहले विभाग की टीम ने निरीक्षण किया था, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है। इसके बाद ही आगामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - डॉ. अनुराधा शर्मा, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला