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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   The pain of displacement comes alive in the poetry collection 'Haldoon Ki Yaadein'.

Kangra News: हल्दून की यादें काव्य संग्रह में जीवंत हुआ विस्थापन का दर्द

Sat, 20 Jun 2026 05:49 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Sat, 20 Jun 2026 05:49 PM IST
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The pain of displacement comes alive in the poetry collection 'Haldoon Ki Yaadein'.
बरियाल (कांगड़ा)। पौंग बांध के निर्माण के बाद विस्थापन का दंश झेलने वाली हल्दून घाटी की सभ्यता, संस्कृति और लोगों की पीड़ा को समेटे साहित्यकार पूर्ण चंद के काव्य संग्रह ‘हल्दून की यादें’ का शनिवार को विमोचन किया गया। धौलाधार साहित्य कला मंच के तत्वावधान में नगरोटा सूरियां के मिलन पैलेस, तीन बोटू में आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी में सेवानिवृत्त एसडीएम सलीम आलम ने पुस्तक का लोकार्पण किया।
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सुकनाड़ा गांव निवासी साहित्यकार पूर्ण चंद ने इस काव्य संग्रह में हल्दून घाटी पर आधारित 100 कविताओं के माध्यम से विस्थापन के दर्द, लोक संस्कृति और स्मृतियों को शब्द दिए हैं। कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
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साहित्यिक संगोष्ठी का संचालन साहित्यकार हरबंत सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रभात शर्मा, गुरदेव भारती, पीसी विश्वकर्मा, शंकर सन्याल, शिव सन्याल, पंकज दर्श, मान सिंह सोहल, प्रतिमा शर्मा, जीवन राणा, वंदना, रेणु कुमारी और अन्य साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। संवाद
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