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Kullu News: ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में दरकी पहाड़ी, बरसात में तबाही की आशंका
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ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में बासु क्षेत्र में भूस्खलन से मची तबाही। जागरूक पाठक
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कुल्लू। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी) के बासु क्षेत्र में पहाड़ी दरकने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह भूस्खलन अक्तूबर 2025 के दौरान हुआ था, लेकिन हाल ही में जब लोग तीर्थ स्थलों पर देव परंपरा के निर्वहन के लिए पहुंचे, तब इस घटना का दृश्य सामने आया। दूरस्थ पहाड़ियों से भूस्खलन की तबाही साफ नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों की ओर से खींचे गए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों को आशंका है कि आने वाली बरसात के मौसम में यह दरकती पहाड़ी बड़ी आपदा का कारण बन सकती है।
नेशनल पार्क प्रबंधन ने फिलहाल किसी बड़े खतरे से इन्कार किया है। अधिकारियों के अनुसार भूस्खलन नाले के पास हुआ है। स्थानीय लोग तीर्थन नदी के पानी के बदले रंग को इस घटना से जोड़कर देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस नाले में मलबा गिरा है, वहां से बहकर आ रही सफेद मिट्टी तीर्थन नदी में मिल रही है, जिससे नदी का पानी भी मटमैला नजर आ रहा है। लोगों में आशंका है कि बरसात के दौरान यदि स्थिति बिगड़ी तो नदी के जरिए नीचे के क्षेत्रों में तबाही मच सकती है। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए समय रहते उचित कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने फोटो और वीडियो प्रशासन को भी सौंपे हैं। इस भूस्खलन में हजारों पेड़ों के नष्ट होने और वन्य जीवों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
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ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्रबंधन पूरी स्थिति पर ड्रोन के माध्यम से नजर बनाए हुए है। यह भूस्खलन पहाड़ से एक नाले में हुआ है जहां अभी तक कोई ऐसी स्थिति नहीं है जिससे खतरा हो। आने वाले समय में इससे कोई खतरा तो नहीं है इसको लेकर भी जीएचएनपी नजर बनाए हुए हैं। यह भूस्खलन पिछले वर्ष अक्तूबर महीने के दौरान हुआ है, तब तक बरसात भी लगभग थम चुकी थी।
-सचिन शर्मा, वन मंडलाधिकारी, जीएचएनपी।
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लोगों ने फोटो और वीडियो भेजकर इसकी जानकारी प्रशासन को दी है। जीएचएनपी का क्षेत्र होने के कारण यह क्षेत्र आने जाने के लिए प्रतिबंधित है और ऐसे में प्रशासन की ओर से जीएचएनपी प्रबंधन को इस मामले की जानकारी जुटाने को कहा गया है।
-पंकज शर्मा, उपमंडलाधिकारी, बंजार
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स्थानीय लोगों की ओर से खींचे गए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों को आशंका है कि आने वाली बरसात के मौसम में यह दरकती पहाड़ी बड़ी आपदा का कारण बन सकती है।
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नेशनल पार्क प्रबंधन ने फिलहाल किसी बड़े खतरे से इन्कार किया है। अधिकारियों के अनुसार भूस्खलन नाले के पास हुआ है। स्थानीय लोग तीर्थन नदी के पानी के बदले रंग को इस घटना से जोड़कर देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस नाले में मलबा गिरा है, वहां से बहकर आ रही सफेद मिट्टी तीर्थन नदी में मिल रही है, जिससे नदी का पानी भी मटमैला नजर आ रहा है। लोगों में आशंका है कि बरसात के दौरान यदि स्थिति बिगड़ी तो नदी के जरिए नीचे के क्षेत्रों में तबाही मच सकती है। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए समय रहते उचित कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने फोटो और वीडियो प्रशासन को भी सौंपे हैं। इस भूस्खलन में हजारों पेड़ों के नष्ट होने और वन्य जीवों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
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ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्रबंधन पूरी स्थिति पर ड्रोन के माध्यम से नजर बनाए हुए है। यह भूस्खलन पहाड़ से एक नाले में हुआ है जहां अभी तक कोई ऐसी स्थिति नहीं है जिससे खतरा हो। आने वाले समय में इससे कोई खतरा तो नहीं है इसको लेकर भी जीएचएनपी नजर बनाए हुए हैं। यह भूस्खलन पिछले वर्ष अक्तूबर महीने के दौरान हुआ है, तब तक बरसात भी लगभग थम चुकी थी।
-सचिन शर्मा, वन मंडलाधिकारी, जीएचएनपी।
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लोगों ने फोटो और वीडियो भेजकर इसकी जानकारी प्रशासन को दी है। जीएचएनपी का क्षेत्र होने के कारण यह क्षेत्र आने जाने के लिए प्रतिबंधित है और ऐसे में प्रशासन की ओर से जीएचएनपी प्रबंधन को इस मामले की जानकारी जुटाने को कहा गया है।
-पंकज शर्मा, उपमंडलाधिकारी, बंजार
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