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Kullu News: जापानी फल की ड्राॅपिंग ने बढ़ाई बागवानों की चिंता
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खराहल (कुल्लू)। जिले में इस वर्ष जापानी फल की अत्यधिक ड्राॅपिंग से बागवान चिंतित हैं। बागवानों का कहना है कि मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण पेड़ों से फल समय से पहले गिर रहे हैं। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
फल गिरने की बढ़ती समस्या के चलते बागवानों को फसल में कमी और आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
घाटी में जापानी फल उत्पादक केहर सिंह, अनूप भंडारी, राजेंद्र ठाकुर, मुनीष, अनीश और ज्ञान ठाकुर ने बताया कि इस बार पेड़ों पर फलों की सेटिंग काफी अच्छी हुई थी। अत्यधिक ड्राॅपिंग के कारण अब फसल कम होती जा रही है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि फलों के गिरने के सटीक कारणों को लेकर बागवान भी असमंजस में हैं।
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बागवानों ने बागवानी विभाग से इस संबंध में विस्तृत जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस समस्या से बचा जा सके। कुल्लू फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि विभाग को इस विषय पर बागवानों को जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
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नमी और मौसम परिवर्तन भी हो सकते हैं कारण : विशेषज्ञ
बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा के सह-निदेशक डॉ. भूपिंद्र ठाकुर ने बताया कि फलों की ड्राॅपिंग के कई कारण हो सकते हैं। मौसम में अचानक बदलाव, बगीचों में अत्यधिक नमी, नाइट्रोजन की अधिक उपलब्धता तथा प्राकृतिक रूप से भी कुछ मात्रा में फल गिरना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि फलों की ड्राॅपिंग को कम करने के लिए बागवानों को सिंचाई और नाइट्रोजन की मात्रा संतुलित रखनी चाहिए। अधिक जानकारी और तकनीकी सलाह के लिए बागवान बागवानी विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
फल गिरने की बढ़ती समस्या के चलते बागवानों को फसल में कमी और आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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घाटी में जापानी फल उत्पादक केहर सिंह, अनूप भंडारी, राजेंद्र ठाकुर, मुनीष, अनीश और ज्ञान ठाकुर ने बताया कि इस बार पेड़ों पर फलों की सेटिंग काफी अच्छी हुई थी। अत्यधिक ड्राॅपिंग के कारण अब फसल कम होती जा रही है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि फलों के गिरने के सटीक कारणों को लेकर बागवान भी असमंजस में हैं।
बागवानों ने बागवानी विभाग से इस संबंध में विस्तृत जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस समस्या से बचा जा सके। कुल्लू फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि विभाग को इस विषय पर बागवानों को जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
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नमी और मौसम परिवर्तन भी हो सकते हैं कारण : विशेषज्ञ
बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा के सह-निदेशक डॉ. भूपिंद्र ठाकुर ने बताया कि फलों की ड्राॅपिंग के कई कारण हो सकते हैं। मौसम में अचानक बदलाव, बगीचों में अत्यधिक नमी, नाइट्रोजन की अधिक उपलब्धता तथा प्राकृतिक रूप से भी कुछ मात्रा में फल गिरना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि फलों की ड्राॅपिंग को कम करने के लिए बागवानों को सिंचाई और नाइट्रोजन की मात्रा संतुलित रखनी चाहिए। अधिक जानकारी और तकनीकी सलाह के लिए बागवान बागवानी विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।