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Kullu News: नए रथ में सवार होकर अपने मूल स्थान टील जाएंगे देवता शांगड़ी नाग
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 08 Jun 2026 11:04 PM IST
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देवता शांगडी नाग। संवाद
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10 जून को बलेहड़ देवालय से होगी रथयात्रा की शुरुआत, शंचूल महादेव से होगा देव मिलन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। रघुपुर घाटी के अधिष्ठाता देवता शांगड़ी नाग नए रथ में सवार होकर अपने मूल स्थान टील (बंजार) की धार्मिक यात्रा पर रवाना होंगे। 10 जून को देवता अपने देवालय बलेहड़ गांव से पूरे विधि-विधान और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्थान करेंगे। इस धार्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं और देवलुओं में भारी उत्साह है।
देव परंपरा के अनुसार देवता शांगड़ी नाग अपने मूल स्थान टील पहुंचेंगे, जहां उनका देव मिलन टील गांव के आराध्य देवता शंचूल महादेव से होगा। यह धार्मिक यात्रा करीब एक सप्ताह तक चलेगी और इसमें रघुपुर घाटी के विभिन्न गांवों के श्रद्धालु शामिल होंगे।
देवता शांगड़ी की रथयात्रा में बलेहड़, दानधार, फनौटी, कुवाटन, छलाच, दरकू, डुघा और बगोला सहित आसपास के गांवों के देवलु भाग लेंगे। 10 जून को सुबह ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच देवता अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ रवाना होंगे। यात्रा के पहले दिन शाम को देवता बछूट गांव पहुंचेंगे।
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देवता के कारदार तेज राम, समिति सचिव दौलत चौहान, तिलक राज, प्रकाश कुमार, कुमार सोनी, परस राम, राजकुमार, घनश्याम लाल, हंस राज, महेंद्र सिंह, सरन दास, मदन लाल, ओमी चंद, धर्म सिंह, सेस राम, गोपाल चंद, मान सिंह पुजारी, बक्शी राम, गूर रूप लाल और प्रताप सिंह ने बताया कि हाल ही में देवता के लिए नया रथ तैयार किया गया है। देव आदेश के अनुसार अब देवता अपने मूल स्थान टील जाएंगे, जिसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उन्होंने बताया कि देवता तीन दिन टील और तीन दिन बछूट गांव में प्रवास कर विभिन्न धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करेंगे। इस दौरान देवता कोठी सराज क्षेत्र के लोगों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद भी प्रदान करेंगे।
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। रघुपुर घाटी के अधिष्ठाता देवता शांगड़ी नाग नए रथ में सवार होकर अपने मूल स्थान टील (बंजार) की धार्मिक यात्रा पर रवाना होंगे। 10 जून को देवता अपने देवालय बलेहड़ गांव से पूरे विधि-विधान और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्थान करेंगे। इस धार्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं और देवलुओं में भारी उत्साह है।
देव परंपरा के अनुसार देवता शांगड़ी नाग अपने मूल स्थान टील पहुंचेंगे, जहां उनका देव मिलन टील गांव के आराध्य देवता शंचूल महादेव से होगा। यह धार्मिक यात्रा करीब एक सप्ताह तक चलेगी और इसमें रघुपुर घाटी के विभिन्न गांवों के श्रद्धालु शामिल होंगे।
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देवता शांगड़ी की रथयात्रा में बलेहड़, दानधार, फनौटी, कुवाटन, छलाच, दरकू, डुघा और बगोला सहित आसपास के गांवों के देवलु भाग लेंगे। 10 जून को सुबह ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच देवता अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ रवाना होंगे। यात्रा के पहले दिन शाम को देवता बछूट गांव पहुंचेंगे।
देवता के कारदार तेज राम, समिति सचिव दौलत चौहान, तिलक राज, प्रकाश कुमार, कुमार सोनी, परस राम, राजकुमार, घनश्याम लाल, हंस राज, महेंद्र सिंह, सरन दास, मदन लाल, ओमी चंद, धर्म सिंह, सेस राम, गोपाल चंद, मान सिंह पुजारी, बक्शी राम, गूर रूप लाल और प्रताप सिंह ने बताया कि हाल ही में देवता के लिए नया रथ तैयार किया गया है। देव आदेश के अनुसार अब देवता अपने मूल स्थान टील जाएंगे, जिसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उन्होंने बताया कि देवता तीन दिन टील और तीन दिन बछूट गांव में प्रवास कर विभिन्न धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करेंगे। इस दौरान देवता कोठी सराज क्षेत्र के लोगों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद भी प्रदान करेंगे।