{"_id":"6a38234abaa4fbda1f0d1cb0","slug":"the-taj-mahal-tender-has-exposed-the-administrative-system-kullu-news-c-89-1-ssml1015-179432-2026-06-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल गया ताजमहल का टेंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल गया ताजमहल का टेंडर
विज्ञापन
कुल्लू के अटल सदन में नाटक का मंचन करते रंगकर्मी।-संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कुल्लू। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल की ओर से आयोजित तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव हिम रंग षष्ठी का रविवार को समापन हुआ। नाट्योत्सव के अंतिम दिन अटल सदन कुल्लू में रंगमंडल के बहुचर्चित एवं पिछले लगभग 28 वर्षों से निरंतर लोकप्रिय रहे नाटक ताजमहल का टेंडर का प्रभावशाली मंचन हुआ। कलाकारों ने नाटक के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोली। दिखाया कि कैसे राजनीतिक हित के चलते महत्वाकांक्षी परियोजना प्रभावित होती है।
नाटक ताजमहल का टेंडर एक उत्कृष्ट व्यंग्य-रचना है, जिसकी मूल कल्पना अत्यंत रोचक है। नाटक प्रश्न उठाता है कि यदि मुगल सम्राट शाहजहां आज के दौर में ताजमहल जैसा स्मारक बनवाने का निर्णय लें और उन्हें सरकारी विभागों, कार्यालयों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़े, तो उन्हें किन-किन जटिल, हास्यास्पद और विडंबनापूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। नाटक केवल फाइलों के अंबार, विभागीय कार्यशैली और प्रशासनिक टालमटोल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भी उजागर करता है कि किस प्रकार राजनीतिक हित, सामाजिक दबाव और विभिन्न बाहरी शक्तियां किसी महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रभावित करती हैं।
ताजमहल जैसे स्मारक का निर्माण किस प्रकार विभिन्न हितों और बहस के बीच उलझ सकता है। देश और विदेश में अनेक बार मंचित हो चुके इस नाटक की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। यही कारण है कि दशकों पुरानी यह प्रस्तुति आज भी दर्शकों से गहरा सहसंबंध स्थापित करती है। संवाद
विज्ञापन
नाटक ताजमहल का टेंडर एक उत्कृष्ट व्यंग्य-रचना है, जिसकी मूल कल्पना अत्यंत रोचक है। नाटक प्रश्न उठाता है कि यदि मुगल सम्राट शाहजहां आज के दौर में ताजमहल जैसा स्मारक बनवाने का निर्णय लें और उन्हें सरकारी विभागों, कार्यालयों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़े, तो उन्हें किन-किन जटिल, हास्यास्पद और विडंबनापूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। नाटक केवल फाइलों के अंबार, विभागीय कार्यशैली और प्रशासनिक टालमटोल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भी उजागर करता है कि किस प्रकार राजनीतिक हित, सामाजिक दबाव और विभिन्न बाहरी शक्तियां किसी महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रभावित करती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ताजमहल जैसे स्मारक का निर्माण किस प्रकार विभिन्न हितों और बहस के बीच उलझ सकता है। देश और विदेश में अनेक बार मंचित हो चुके इस नाटक की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। यही कारण है कि दशकों पुरानी यह प्रस्तुति आज भी दर्शकों से गहरा सहसंबंध स्थापित करती है। संवाद