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Japanese Fruit: हिमाचल प्रदेश के जापानी फल से महकेंगे उत्तराखंड के बगीचे, कुल्लू से पौधे मंगवा रहे बागवान

बलदेव राज, कुल्लू। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 04 Feb 2026 05:00 AM IST
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सार

उत्तराखंड के बागवान कुल्लू जिले से जापानी फल के पौधे मंगवा रहे हैं। बता दें कि कुल्लू जिले की नर्सरियों से अब तक उत्तराखंड, गुजरात और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए करीब दो लाख पौधे भेजे जा चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर...

Uttarakhand orchards will be filled with the fragrance of Japanese fruit from Himachal Pradesh
कुल्लू की लगघाटी में जापानी फल का एक पौधा/जापानी फल के पौधों के साथ एक बागवान। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के जापानी फल की मिठास अब पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के पहाड़ों तक पहुंचने वाली है। कुल्लू जिले में तैयार होने वाले उच्च गुणवत्ता के जापानी फल के पौधों की उत्तराखंड में भारी मांग देखी जा रही है। देवभूमि उत्तराखंड के बागवान अपने बगीचों में फूयू वैरायटी के जापानी फल उगाकर अपनी कमाई बढ़ाने की तैयारी में हैं।

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कुल्लू जिले की नर्सरियों से अब तक उत्तराखंड, गुजरात और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए करीब दो लाख पौधे भेजे जा चुके हैं। इनमें से करीब एक लाख पौधे उत्तराखंड भेजे गए हैं। बेहतर गुणवत्ता और अनुकूल जलवायु के कारण उत्तराखंड के बागवानों ने कुल्लू की नर्सरियों पर सबसे अधिक भरोसा जताया है। बिना कसैलेपन वाली फूयू वैरायटी की सबसे अधिक डिमांड है।
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कुल्लू सदर फल उत्पादक संगठन के महासचिव सुनील राणा कहते हैं कि लगघाटी सहित अन्य क्षेत्र के बागवानों ने जापानी फल को अपनी आय का प्रमुख साधन बनाया है। कुल्लू की नर्सरियों से हर साल करोड़ों का कारोबार होता है। फरवरी के अंत तक कुल्लू की नर्सरियों में 80 फीसदी से अधिक पौधों का स्टॉक खत्म होने की उम्मीद है। कुल्लू के नर्सरी संचालक जोगी ठाकुर के अनुसार उत्तराखंड के बागवानों ने हजारों की संख्या में एडवांस ऑर्डर देकर पौधे खरीदे हैं। उत्तराखंड के बागवानों को 100 से 200 रुपये की रेंज में पौधे उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर है जापानी फल
उत्तराखंड में इस फल की बढ़ती लोकप्रियता की बड़ी वजह इसके स्वास्थ्य लाभ भी हैं। इसमें विटामिन ए और सी के साथ भरपूर फाइबर होता है। यह हृदय, आंखों और पाचन तंत्र के लिए रामबाण माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण जापानी फल रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
 

बारिश-बर्फबारी के बाद जम्मू-कश्मीर में सेब की मांग
सिर्फ जापानी फल ही नहीं बल्कि कुल्लू के सेब और प्लम के पौधों ने भी बाहरी राज्यों में धूम मचा रखी है। कुल्लू के सेब के पौधों की सबसे ज्यादा मांग जम्मू-कश्मीर में है। हाल ही में हुई बारिश और बर्फबारी के बाद पौधों की डिमांड दोगुनी हो गई है, जिससे करोड़ों का कारोबार होने की उम्मीद है।
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