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Kullu News: मौसम ने तोड़े बागवानों के अरमान, आधी रह सकती है सेब की फसल
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मनाली। कुल्लू जिले सहित पूरी ऊझी घाटी में इस वर्ष सेब उत्पादन में गिरावट दर्ज होने की आशंका है। मौसम की मार ने बागवानों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। घाटी के अधिकांश क्षेत्रों में सेब उत्पादन 70 से 80 प्रतिशत तक घट सकता है, जबकि पूरे जिले में उत्पादन करीब 50 प्रतिशत कम रहने का अनुमान है। फ्लावरिंग के दौरान लगातार हुई बारिश और प्रतिकूल मौसम के कारण बड़ी संख्या में फूल मुरझा गए, जिससे फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
ऊझी घाटी के बागवानों का कहना है कि इस बार मौसम ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। मार्च और अप्रैल में सेब के पेड़ों पर फूल आने के समय लगातार बारिश और ठंडे मौसम ने फूलों को नुकसान पहुंचाया। सामान्य परिस्थितियों में मधुमक्खियां और अन्य परागण करने वाले कीट फूलों का परागण कर अच्छी फसल सुनिश्चित करते हैं, लेकिन इस बार खराब मौसम के कारण परागण प्रक्रिया प्रभावित रही। कई दिनों तक धूप न निकलने और लगातार नमी बने रहने से बड़ी संख्या में फूल झड़ गए। जिन फूलों से फल बनना था, वे मुरझाकर गिर गए। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। घाटी के कई बगीचों में सामान्य वर्षों की तुलना में बेहद कम फल दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय बागवान चमन लाल, राम लाल शर्मा, रोशन ठाकुर और नकुल खुल्लर ने बताया कि उत्पादन में आई भारी कमी से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि सेब की फसल तैयार करने में खाद, दवाइयों, सिंचाई, छंटाई और मजदूरी पर भारी खर्च होता है। पूरे वर्ष बगीचों की देखभाल में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इस बार उत्पादन इतना कम है कि लागत निकालना भी मुश्किल नजर आ रहा है।
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बागवानों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है। कभी बेमौसम बारिश, कभी ओलावृष्टि और कभी तापमान में अचानक बदलाव बागवानी को प्रभावित कर रहे हैं। इस बार फ्लावरिंग के दौरान हुई बारिश ने सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। उनका मानना है कि यदि मौसम का यही रुख रहा तो आने वाले वर्षों में सेब उत्पादन के सामने और भी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजकुमार ने बताया कि इस वर्ष घाटी में उत्पादन काफी कम रहने की संभावना है। विभाग वास्तविक उत्पादन का आकलन कर रहा है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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ऊझी घाटी के बागवानों का कहना है कि इस बार मौसम ने उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। मार्च और अप्रैल में सेब के पेड़ों पर फूल आने के समय लगातार बारिश और ठंडे मौसम ने फूलों को नुकसान पहुंचाया। सामान्य परिस्थितियों में मधुमक्खियां और अन्य परागण करने वाले कीट फूलों का परागण कर अच्छी फसल सुनिश्चित करते हैं, लेकिन इस बार खराब मौसम के कारण परागण प्रक्रिया प्रभावित रही। कई दिनों तक धूप न निकलने और लगातार नमी बने रहने से बड़ी संख्या में फूल झड़ गए। जिन फूलों से फल बनना था, वे मुरझाकर गिर गए। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। घाटी के कई बगीचों में सामान्य वर्षों की तुलना में बेहद कम फल दिखाई दे रहे हैं।
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स्थानीय बागवान चमन लाल, राम लाल शर्मा, रोशन ठाकुर और नकुल खुल्लर ने बताया कि उत्पादन में आई भारी कमी से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि सेब की फसल तैयार करने में खाद, दवाइयों, सिंचाई, छंटाई और मजदूरी पर भारी खर्च होता है। पूरे वर्ष बगीचों की देखभाल में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इस बार उत्पादन इतना कम है कि लागत निकालना भी मुश्किल नजर आ रहा है।
बागवानों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है। कभी बेमौसम बारिश, कभी ओलावृष्टि और कभी तापमान में अचानक बदलाव बागवानी को प्रभावित कर रहे हैं। इस बार फ्लावरिंग के दौरान हुई बारिश ने सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। उनका मानना है कि यदि मौसम का यही रुख रहा तो आने वाले वर्षों में सेब उत्पादन के सामने और भी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजकुमार ने बताया कि इस वर्ष घाटी में उत्पादन काफी कम रहने की संभावना है। विभाग वास्तविक उत्पादन का आकलन कर रहा है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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