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Kullu: परगाणू पंचायत के प्रधान सेस राम ने अपने खर्चे पर बनाई पुलिया
Ankesh Dogra
Updated Tue, 23 Jun 2026 10:49 AM IST
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पंचायत प्रतिनिधि बनने के बाद विकास के बड़े-बड़े दावे करना आम बात है, लेकिन परगाणू पंचायत के नव निर्वाचित प्रधान सेस राम आजाद ने अपने कार्यों से यह साबित कर दिया है कि जनसेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि संकल्प और समर्पण से होती है। यही वजह है कि आज वे पूरे जिले के पंचायत प्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा और मिसाल बनकर उभरे हैं। विशेष बात यह है कि सेस राम आजाद ने प्रधान पद की शपथ लेने का इंतजार भी नहीं किया। पंचायत की जिम्मेदारी संभालने से पहले ही उन्होंने अपने निजी खर्च से लोगों की सुविधा के लिए विकास कार्य शुरू कर दिए। वर्ष 2023 में खोखन नाला में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई पुलिया लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। सरकार और प्रशासन की ओर से इसके पुनर्निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, लेकिन सेस राम ने पहल करते हुए मात्र तीन दिनों के भीतर अपने खर्च पर आरसीसी पुलिया का निर्माण करवा दिया। इस पुलिया के बनने से केवल परगाणू पंचायत ही नहीं, बल्कि शूरढ़ और खोखन पंचायत के सैकड़ों लोगों को भी राहत मिली है। वर्षों से जिस सुविधा का लोग इंतजार कर रहे थे, वह एक जनप्रतिनिधि की इच्छाशक्ति से साकार हो गई। यही नहीं, उन्होंने क्षेत्र में स्थित पीपल के पेड़ के आसपास सौंदर्यीकरण का कार्य भी अपने निजी खर्च से शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में वार्ड नंबर एक से तीन तक निकासी नालियों का निर्माण भी अपने खर्चे से करवाने की घोषणा की है। इन कार्याें पर वह चार से पांच लाख रुपये खर्च करने का काम कर रहे हैं। सेस राम आजाद का कहना है कि उन्होंने प्रधान पद केवल जनसेवा के उद्देश्य से स्वीकार किया है। लोगों से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करना उनकी प्राथमिकता है। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं से विकास कार्य होते रहेंगे, लेकिन जो कार्य तत्काल जरूरी हैं, उन्हें करने में देरी नहीं होनी चाहिए। आज जब जनप्रतिनिधियों पर अक्सर वादाखिलाफी के आरोप लगते हैं, ऐसे समय में सेस राम आजाद ने सेवा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो न केवल उनकी पंचायत बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणादायक है। उनके इस प्रयास ने साबित कर दिया है कि यदि जनप्रतिनिधि संकल्पित हो तो विकास के लिए केवल सरकारी संसाधनों का इंतजार करना जरूरी नहीं, बल्कि जनहित की भावना सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
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