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Mandi News: भूमि अधिग्रहण मामलों में एनएचएआई की 9 याचिकाएं खारिज
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मंडी। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में जिला एवं सत्र न्यायालय मंडी की अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राजमार्ग प्रशासन की ओर से दायर कुल 9 याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थ की ओर से पारित अवार्ड में धारा 34 मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम 1996 के तहत हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
दलीप सिंह से जुड़े मामले में मंत्रालय और भूमि स्वामी दोनों ने मध्यस्थ के 2 अप्रैल 2024 के अवार्ड को चुनौती दी थी। अदालत ने दोनों पक्षों की आपत्तियां खारिज करते हुए अवार्ड को बरकरार रखा। इस प्रकरण में दो याचिकाएं खारिज हुईं। एनएचएआई बनाम तुलसी राम और अन्य के मामले में एक ही गांव से जुड़े चार अलग-अलग प्रकरणों में मुआवजा 41 लाख रुपये प्रति बीघा से बढ़ाकर 47 लाख रुपये प्रति बीघा किया गया था। इन चारों मामलों में एनएचएआई की आपत्तियां अस्वीकार कर दी गईं। यहां चार याचिकाएं खारिज हुईं।
कमला देवी और अन्य से संबंधित प्रकरण में भी मुआवजा निर्धारण को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने अवार्ड को विधिसम्मत मानते हुए याचिका खारिज कर दी। यहां एक याचिका निरस्त हुई। इसी तरह देवेंद्र सिंह तथा सुरेश शर्मा से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में ब्याज और वैधानिक लाभों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने पाया कि मध्यस्थ का आदेश तर्कसंगत और साक्ष्यों पर आधारित है। इन दोनों मामलों में भी दो याचिकाएं खारिज कर दी गईं। इस प्रकार कुल मिलाकर 9 याचिकाएं खारिज हुईं और सभी मामलों में मध्यस्थ के अवार्ड को यथावत रखा गया।
न्यायालय ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 34 के तहत अदालत अपीलीय अदालत की तरह साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकती। केवल स्पष्ट अवैधता या लोक नीति के विरुद्ध होने पर ही अवार्ड में हस्तक्षेप संभव है।
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दलीप सिंह से जुड़े मामले में मंत्रालय और भूमि स्वामी दोनों ने मध्यस्थ के 2 अप्रैल 2024 के अवार्ड को चुनौती दी थी। अदालत ने दोनों पक्षों की आपत्तियां खारिज करते हुए अवार्ड को बरकरार रखा। इस प्रकरण में दो याचिकाएं खारिज हुईं। एनएचएआई बनाम तुलसी राम और अन्य के मामले में एक ही गांव से जुड़े चार अलग-अलग प्रकरणों में मुआवजा 41 लाख रुपये प्रति बीघा से बढ़ाकर 47 लाख रुपये प्रति बीघा किया गया था। इन चारों मामलों में एनएचएआई की आपत्तियां अस्वीकार कर दी गईं। यहां चार याचिकाएं खारिज हुईं।
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कमला देवी और अन्य से संबंधित प्रकरण में भी मुआवजा निर्धारण को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने अवार्ड को विधिसम्मत मानते हुए याचिका खारिज कर दी। यहां एक याचिका निरस्त हुई। इसी तरह देवेंद्र सिंह तथा सुरेश शर्मा से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में ब्याज और वैधानिक लाभों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने पाया कि मध्यस्थ का आदेश तर्कसंगत और साक्ष्यों पर आधारित है। इन दोनों मामलों में भी दो याचिकाएं खारिज कर दी गईं। इस प्रकार कुल मिलाकर 9 याचिकाएं खारिज हुईं और सभी मामलों में मध्यस्थ के अवार्ड को यथावत रखा गया।
न्यायालय ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 34 के तहत अदालत अपीलीय अदालत की तरह साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकती। केवल स्पष्ट अवैधता या लोक नीति के विरुद्ध होने पर ही अवार्ड में हस्तक्षेप संभव है।
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