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Mandi News: मृतक क्लीनर के परिजनों को 9.14 लाख मुआवजा
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मंडी। किन्नौर जिले में वर्ष 2010 में सतलुज नदी में वाहन गिरने से लापता हुए क्लीनर के मामले में करीब 16 वर्ष बाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण सुंदरनगर ने अहम फैसला सुनाया है। अधिकरण ने मृतक इंद्र सिंह के आश्रितों को 9,14,600 रुपये मुआवजा 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं।
मामले के तथ्यों के अनुसार इंद्र सिंह महिंद्रा पिकअप में क्लीनर के रूप में कार्यरत थे। 16 अक्तूबर 2010 को वह उक्त वाहन से किन्नौर की ओर जा रहे थे। सुबह करीब 6 बजे पुरानी टापरी जिला किन्नौर के समीप चालक हेमराज वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। वाहन सतलुज नदी में गिर गया और चालक व क्लीनर दोनों नदी में बह गए। दोनों के शव बरामद नहीं हो सके। इस संबंध में थाना भावानगर-निचार जिला किन्नौर में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
परिजनों ने 2021 में दावा याचिका दायर की। अदालत के समक्ष बीमा कंपनी ने दलील दी थी कि चालक का ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी था, इसलिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है। हालांकि अधिकरण ने पाया कि बीमाकर्ता लाइसेंस संबंधी शर्तों के उल्लंघन को प्रमाणित नहीं कर सका। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना के समय वाहन बीमित था, इसलिए बीमा कंपनी को ही मुआवजा राशि अदा करनी होगी और वह वाहन स्वामी को प्रतिपूर्ति करेगी।
साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अधिकरण ने माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई। मृतक की आय को 3,500 रुपये प्रतिमाह स्वीकार किया गया। अदालत ने कुल मुआवजा 9,14,600 रुपये निर्धारित किया। संवाद
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मामले के तथ्यों के अनुसार इंद्र सिंह महिंद्रा पिकअप में क्लीनर के रूप में कार्यरत थे। 16 अक्तूबर 2010 को वह उक्त वाहन से किन्नौर की ओर जा रहे थे। सुबह करीब 6 बजे पुरानी टापरी जिला किन्नौर के समीप चालक हेमराज वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। वाहन सतलुज नदी में गिर गया और चालक व क्लीनर दोनों नदी में बह गए। दोनों के शव बरामद नहीं हो सके। इस संबंध में थाना भावानगर-निचार जिला किन्नौर में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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परिजनों ने 2021 में दावा याचिका दायर की। अदालत के समक्ष बीमा कंपनी ने दलील दी थी कि चालक का ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी था, इसलिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है। हालांकि अधिकरण ने पाया कि बीमाकर्ता लाइसेंस संबंधी शर्तों के उल्लंघन को प्रमाणित नहीं कर सका। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना के समय वाहन बीमित था, इसलिए बीमा कंपनी को ही मुआवजा राशि अदा करनी होगी और वह वाहन स्वामी को प्रतिपूर्ति करेगी।
साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अधिकरण ने माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई। मृतक की आय को 3,500 रुपये प्रतिमाह स्वीकार किया गया। अदालत ने कुल मुआवजा 9,14,600 रुपये निर्धारित किया। संवाद