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Mandi News: शराब ठेके के समर्थन में उतरा महिलाओं का दूसरा गुट, तीखी बहस
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गोहर पंचायत क्षेत्र में आंदोलन को लगा बड़ा झटका
अप्रत्याशित विरोध के बाद से पंचायत में तनावपूर्ण स्थिति
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से शराब ठेके के खिलाफ आंदोलन कर रही महिलाओं को बड़ा झटका तब लगा, जब स्थानीय महिलाओं का एक दूसरा गुट ठेके के समर्थन में सामने आया। यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई और क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी। ठेके के समर्थन में आई महिलाओं ने आंदोलनकारी महिलाओं के साथ तीखी बहस की और धक्का-मुक्की भी हुई। उनका तर्क था कि ठेका बंद करने से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अगर लोग शराब पीना छोड़ दें तो ठेके अपने आप बंद हो जाएंगे और इसके लिए शुरुआत अपने घरों से ही करनी होगी।
सपोर्ट करने वाली महिलाओं ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन केवल अवैध शराब माफिया की साजिश है। उनका कहना था कि बस्सी और आसपास के गांवों में पहले से ही बड़ी मात्रा में अवैध और कच्ची शराब बेची जा रही है। यदि वैध ठेका बंद हो गया तो चोरी-छिपे बिकने वाली जहरीली शराब का कारोबार और बढ़ जाएगा। इस अप्रत्याशित विरोध के बाद से पंचायत में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
राजनीतिक रंग पकड़ता आंदोलन
शराब ठेके के विरोध में चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है। क्षेत्र में चर्चा है कि इस आंदोलन की आड़ में कुछ महिलाएं आगामी पंचायत चुनाव की तैयारी कर रही हैं। इस बार बस्सी पंचायत में प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित है और इसके लिए दावेदार सक्रिय हो गई हैं। विरोधी गुट का दावा है कि कुछ महिलाएं अपनी राजनीतिक छवि चमकाने के लिए इस मुद्दे को बढ़ा रही हैं।
दूसरी ओर ठेके के समर्थन में आई महिलाओं ने भी इन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर सवाल उठाए हैं। उधर, एसडीएम देवीराम ने बताया कि गांव में शराब ठेके को अन्यत्र स्थानांतरित करने के प्रयास जारी हैं।
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अप्रत्याशित विरोध के बाद से पंचायत में तनावपूर्ण स्थिति
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से शराब ठेके के खिलाफ आंदोलन कर रही महिलाओं को बड़ा झटका तब लगा, जब स्थानीय महिलाओं का एक दूसरा गुट ठेके के समर्थन में सामने आया। यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई और क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी। ठेके के समर्थन में आई महिलाओं ने आंदोलनकारी महिलाओं के साथ तीखी बहस की और धक्का-मुक्की भी हुई। उनका तर्क था कि ठेका बंद करने से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अगर लोग शराब पीना छोड़ दें तो ठेके अपने आप बंद हो जाएंगे और इसके लिए शुरुआत अपने घरों से ही करनी होगी।
सपोर्ट करने वाली महिलाओं ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन केवल अवैध शराब माफिया की साजिश है। उनका कहना था कि बस्सी और आसपास के गांवों में पहले से ही बड़ी मात्रा में अवैध और कच्ची शराब बेची जा रही है। यदि वैध ठेका बंद हो गया तो चोरी-छिपे बिकने वाली जहरीली शराब का कारोबार और बढ़ जाएगा। इस अप्रत्याशित विरोध के बाद से पंचायत में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
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राजनीतिक रंग पकड़ता आंदोलन
शराब ठेके के विरोध में चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है। क्षेत्र में चर्चा है कि इस आंदोलन की आड़ में कुछ महिलाएं आगामी पंचायत चुनाव की तैयारी कर रही हैं। इस बार बस्सी पंचायत में प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित है और इसके लिए दावेदार सक्रिय हो गई हैं। विरोधी गुट का दावा है कि कुछ महिलाएं अपनी राजनीतिक छवि चमकाने के लिए इस मुद्दे को बढ़ा रही हैं।
दूसरी ओर ठेके के समर्थन में आई महिलाओं ने भी इन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर सवाल उठाए हैं। उधर, एसडीएम देवीराम ने बताया कि गांव में शराब ठेके को अन्यत्र स्थानांतरित करने के प्रयास जारी हैं।

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