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आग की घटनाओं से निपटने की तैयारी रखें विभाग : डीसी
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मंडी। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा है कि जिले में लंबी अवधि से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। इस कारण आग लगने की घटनाओं सहित अन्य कई प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं।
हाल ही में प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर आग लगने की दुखद घटनाएं सामने आई हैं। इस तरह की घटनाओं की आशंकाओं को न्यून करने और आपात स्थिति में प्रभावितों तक त्वरित सहायता पहुंचाना स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित विभागों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संबंधित विभाग आवश्यक मशीनरी, उपकरण तथा अन्य संसाधनों को तैयार रखें। राहत शिविरों सहित प्रभावितों के उपचार इत्यादि के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाए रखें। विद्युत बोर्ड और जल शक्ति विभाग भी अपने स्तर पर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें।
बीते सायं मंडी जिले में सूखे जैसी स्थिति के दृष्टिगत विभिन्न चुनौतियों सहित अग्नि सुरक्षा पर पूर्व तैयारियों की समीक्षा के लिए एक बैठक का आयोजन किया गया। उपायुक्त ने वन, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, अग्निशमन विभाग तथा शहरी निकायों को निर्देश दिए कि लोगों को आग लगने के कारणों एवं बचाव के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाएं। आगामी 21 व 22 जनवरी को होने वाली ग्राम सभाओं में भी आग से बचाव के बारे में जागरूकता संबंधी एजेंडा शामिल किया जाए। जन जागरूकता में अग्निशमन, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ इत्यादि से भी सहयोग लिया जाए।
गौशालाओं तथा घरों के लिए बिजली की तारों की जांच कर लें कि वे अधिक पुरानी न हों, ताकि शार्ट सर्किट इत्यादि की संभावनाएं कम की जा सकें। घरों में रसोई गैस सिलिंडरों की भी लीकेज इत्यादि के लिए नियमित जांच करते रहें। घरों तथा व्यावसायिक परिसरों में रसोई गैस सिलिंडरों के भंडारण पर विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि होटल, रेस्तरां, ढाबों इत्यादि में रसोई गैस सिलिंडरों के प्रयोग व इनके भंडारण की मानकों अनुसार समुचित जांच सुनिश्चित की जाए।
प्राकृतिक पेयजल स्रोतों, जल भंडारण इकाइयों की पहचान कर इनकी क्षमता इत्यादि भी जांच लें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग आग बुझाने के लिए किया जा सके। उन्होंने शहरी निकायों को फायर हाइड्रेंट इत्यादि की नियमित जांच करने के निर्देश भी दिए।
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हाल ही में प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर आग लगने की दुखद घटनाएं सामने आई हैं। इस तरह की घटनाओं की आशंकाओं को न्यून करने और आपात स्थिति में प्रभावितों तक त्वरित सहायता पहुंचाना स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित विभागों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संबंधित विभाग आवश्यक मशीनरी, उपकरण तथा अन्य संसाधनों को तैयार रखें। राहत शिविरों सहित प्रभावितों के उपचार इत्यादि के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाए रखें। विद्युत बोर्ड और जल शक्ति विभाग भी अपने स्तर पर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें।
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बीते सायं मंडी जिले में सूखे जैसी स्थिति के दृष्टिगत विभिन्न चुनौतियों सहित अग्नि सुरक्षा पर पूर्व तैयारियों की समीक्षा के लिए एक बैठक का आयोजन किया गया। उपायुक्त ने वन, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, अग्निशमन विभाग तथा शहरी निकायों को निर्देश दिए कि लोगों को आग लगने के कारणों एवं बचाव के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाएं। आगामी 21 व 22 जनवरी को होने वाली ग्राम सभाओं में भी आग से बचाव के बारे में जागरूकता संबंधी एजेंडा शामिल किया जाए। जन जागरूकता में अग्निशमन, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ इत्यादि से भी सहयोग लिया जाए।
गौशालाओं तथा घरों के लिए बिजली की तारों की जांच कर लें कि वे अधिक पुरानी न हों, ताकि शार्ट सर्किट इत्यादि की संभावनाएं कम की जा सकें। घरों में रसोई गैस सिलिंडरों की भी लीकेज इत्यादि के लिए नियमित जांच करते रहें। घरों तथा व्यावसायिक परिसरों में रसोई गैस सिलिंडरों के भंडारण पर विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि होटल, रेस्तरां, ढाबों इत्यादि में रसोई गैस सिलिंडरों के प्रयोग व इनके भंडारण की मानकों अनुसार समुचित जांच सुनिश्चित की जाए।
प्राकृतिक पेयजल स्रोतों, जल भंडारण इकाइयों की पहचान कर इनकी क्षमता इत्यादि भी जांच लें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग आग बुझाने के लिए किया जा सके। उन्होंने शहरी निकायों को फायर हाइड्रेंट इत्यादि की नियमित जांच करने के निर्देश भी दिए।
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