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Mandi News: भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि से बागवान चिंतित
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sun, 05 Apr 2026 04:15 AM IST
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रघुपुर घाटी के बनाला गांव में हुई ओलावृष्टि। संवाद
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भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि से बागवान चिंतित
रघुपुर घाटी में सेब के बगीचों में शुरू हो गई है फ्लावरिंग
हर साल ओलावृष्टि से बागवानों को उठाना पड़ता है नुकसान
संबद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले की रघुपुर घाटी में शनिवार को भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। घाटी में इन दिनों सेब के बगीचों में फ्लावरिंग का दौर शुरू हो गया है, लेकिन लगातार मौसम खराब रहने से बागवान परेशान हो गए। रघुपुर घाटी ओलावृष्टि के लिए अति संवेदनशील है और हर साल ओलावृष्टि से यहां बागवानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ता है।
शनिवार दोपहर बाद करीब 2 बजे एक जहां गरज के साथ भारी बारिश हुई, वहीं इस बीच ओले भी गिरे। हालांकि ओलावृष्टि से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है लेकिन बागवान आने वाली सेब की फसल और मौसम के रुख से चिंतित हैं।
बागवान ओमप्रकाश ठाकुर, किशोरी लाल, अशोक कुमार, सुंदर सिंह, हंसराज और बेली राम ने कहा कि हर बार मौसम के कारण बागवानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक से घाटी के बागवान ओलावृष्टि से लाखों रुपये का नुकसान उठा चुके हैं। रघुपुर के कई बागवानों ने ओलों से बचने के लिए हेलनेट भी लगाई हैं। लेकिन यह अभी मात्र 10 फीसदी बागवानों ने ही हेलनेट लगाई है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि का खतरा 15 मई तक रहता है।
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रघुपुर घाटी में सेब के बगीचों में शुरू हो गई है फ्लावरिंग
हर साल ओलावृष्टि से बागवानों को उठाना पड़ता है नुकसान
संबद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले की रघुपुर घाटी में शनिवार को भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। घाटी में इन दिनों सेब के बगीचों में फ्लावरिंग का दौर शुरू हो गया है, लेकिन लगातार मौसम खराब रहने से बागवान परेशान हो गए। रघुपुर घाटी ओलावृष्टि के लिए अति संवेदनशील है और हर साल ओलावृष्टि से यहां बागवानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ता है।
शनिवार दोपहर बाद करीब 2 बजे एक जहां गरज के साथ भारी बारिश हुई, वहीं इस बीच ओले भी गिरे। हालांकि ओलावृष्टि से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है लेकिन बागवान आने वाली सेब की फसल और मौसम के रुख से चिंतित हैं।
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बागवान ओमप्रकाश ठाकुर, किशोरी लाल, अशोक कुमार, सुंदर सिंह, हंसराज और बेली राम ने कहा कि हर बार मौसम के कारण बागवानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक से घाटी के बागवान ओलावृष्टि से लाखों रुपये का नुकसान उठा चुके हैं। रघुपुर के कई बागवानों ने ओलों से बचने के लिए हेलनेट भी लगाई हैं। लेकिन यह अभी मात्र 10 फीसदी बागवानों ने ही हेलनेट लगाई है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि का खतरा 15 मई तक रहता है।

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