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HP Assembly: मुकेश बोले- सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को हिम बस कार्ड में रियायत देने पर हो रहा विचार

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 23 Mar 2026 03:50 PM IST
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सार

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हिम बस कार्ड बनाने से रियायत देने पर सरकार विचार कर रही है। 

HP Assembly session The State Government will review the matter of 'Him Bus Cards' for government school stude
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री। (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हिम बस कार्ड बनाने से रियायत देने पर सरकार विचार कर रही है। सोमवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के सवाल पर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निगम की बसों में सभी रियायती एवं निशुल्क श्रेणियों के यात्रियों को सुविधा प्राप्त करने के लिए हिम बस कार्ड बनाना अनिवार्य किया गया है। प्रदेश में अभी तक दो लाख हिम बस कार्ड बन चुके हैं। अमर उजाला ने 15 मार्च के अंक में हिम बस कार्ड के नाम पर विद्यार्थियों पर डाले गए अतिरिक्त आर्थिक बोझ का मामला प्राथमिकता से उठाया था।

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खबर के माध्यम से बताया गया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को मिलने वाली निशुल्क बस सेवा 1 अप्रैल से पूरी तरह मुफ्त नहीं मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को पहले 236 रुपये खर्च कर हिम बस पास बनवाना अनिवार्य होगा, तभी उन्हें मुफ्त बस यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 8.50 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से लाखों विद्यार्थी स्कूल दूर होने के चलते एचआरटीसी बसों में आते-जाते हैं। अब इन्हें हिम बस पास बनवाना अनिवार्य किया गया है। पास के लिए लोकमित्र केंद्र के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया के लिए विद्यार्थियों को अतिरिक्त 40 रुपये की फीस भी देनी पड़ रही है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बीते कई वर्षों से निशुल्क बस सुविधा का लाभ मिलता आ रहा है। हालांकि, अब सरकार ने इस फैसले की समीक्षा करने को कहा है।
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महिलाओं को 31 मार्च के बाद नहीं मिलेगी रियायती सेवा
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को बस किराये में छूट दी जा रही है। 31 मार्च तक कार्ड बनाए जाएंगे। इसके बाद कार्ड के बिना रियायती सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। बाहरी राज्यों की कई महिलाएं भी इस सुविधा का लाभ उठा रही हैं। कार्ड बनाने से यह पता चल सकेगा कि वास्तविकता में कितनी महिलाओं को लाभ मिल रहा है। इससे सरकार से सब्सिडी लेने के लिए आंकड़ा भी प्राप्त हो जाएगा। पहले वर्ष में 236 रुपये में कार्ड बनाया जा रहा है। इसमें 18 फीसदी जीएसटी शामिल है। अगले वर्ष जीएसटी सहित 177 रुपये के वार्षिक शुल्क में कार्ड बनेगा।
 

सुधीर बोले, 1500 रुपये नहीं मिले, मुकेश ने कहा कि 15 लाख कहां हैं
सुधीर शर्मा ने कहा कि सरकार की महिलाओं को 1500 रुपये देने की गारंटी थी। जब तक सभी महिलाओं को 1500 रुपये नहीं मिल जाते, तब तक हिम बस कार्ड की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए। इस पर मुकेश ने पलटवार कर कहा कि सभी को 15-15 लाख रुपये देने का क्या हुआ। 15 लाख मिलने तक क्या सभी को छूट दे दी जाए। इस पर नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि 15 लाख रुपये कालाधन वापस आने पर देने की बात हुई थी। इस पर मुकेश ने कहा कि सही बात है, कालाधन तो विदेश से आया नहीं है। देश का पैसा लेकर कुछ लोग जरूर विदेश चले गए।

महिलाओं को किराये में रियायत से पड़ा 82 करोड़ का आर्थिक बोझ
शिमला। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि एचआरटीसी पर महिलाओं को किराये में दी जा रही रियायत से 82.27 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ा है। निगम की बसों में महिलाओं को किराये में 50 फीसदी की छूट दी जा रही है। प्रति माह औसतन 37 लाख 77 हजार 940 महिलाएं इस योजना से लाभान्वित होती हैं। वर्ष 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 4 करोड़ 91 लाख 13 हजार 220 महिलाओं ने इसका लाभ लिया। 

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