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मंडी नगर निगम : 42 प्रत्याशियों की किस्मत 14 दिन के लिए ईवीएम में कैद
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14 वार्डों के लिए हुआ मतदान, अब 31 मई को आएंगे नतीजे
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम मंडी के 14 वार्डों में रविवार को मतदान के साथ 42 प्रत्याशियों की किस्मत 14 दिनों के लिए ईवीएम में कैद हो गई है। चुनाव परिणाम 31 मई को घोषित किए जाएंगे। मंडी नगर निगम में 68.78 प्रतिशत मतदान हुआ है। पांच साल पहले 70 प्रतिशत मतदान नगर निगम में दर्ज किया गया था। इस बार कम मतदान हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह नगर मंडी में भाजपा अपना वर्चस्व कायम रख पाएगी या कांग्रेस सत्ता परिवर्तन का संकेत देगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। पिछली बार नगर निगम की 15 सीटों में से भाजपा ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि कांग्रेस को चार सीटें मिली थीं।
चुनाव प्रचार के दौरान इस बार अपेक्षाकृत शांत माहौल देखने को मिला। मतदाता भी खुलकर अपनी पसंद जाहिर करने से बचते नजर आए। हालांकि राजनीतिक दलों ने इसे प्रतिष्ठा का चुनाव मानते हुए पूरी ताकत झोंकी। मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री समेत दोनों दलों के कई बड़े नेता चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे।
बैहना वार्ड के लोगों द्वारा नगर निगम से बाहर किए जाने की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार किए जाने का मामला भी इस बार चर्चा में रहा। वार्ड के सभी प्रत्याशियों ने नाम वापस लेने का फैसला किया, जिससे वहां चुनाव नहीं हुआ। नगर निगम चुनाव के नतीजों का असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम मंडी के 14 वार्डों में रविवार को मतदान के साथ 42 प्रत्याशियों की किस्मत 14 दिनों के लिए ईवीएम में कैद हो गई है। चुनाव परिणाम 31 मई को घोषित किए जाएंगे। मंडी नगर निगम में 68.78 प्रतिशत मतदान हुआ है। पांच साल पहले 70 प्रतिशत मतदान नगर निगम में दर्ज किया गया था। इस बार कम मतदान हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह नगर मंडी में भाजपा अपना वर्चस्व कायम रख पाएगी या कांग्रेस सत्ता परिवर्तन का संकेत देगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। पिछली बार नगर निगम की 15 सीटों में से भाजपा ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि कांग्रेस को चार सीटें मिली थीं।
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चुनाव प्रचार के दौरान इस बार अपेक्षाकृत शांत माहौल देखने को मिला। मतदाता भी खुलकर अपनी पसंद जाहिर करने से बचते नजर आए। हालांकि राजनीतिक दलों ने इसे प्रतिष्ठा का चुनाव मानते हुए पूरी ताकत झोंकी। मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री समेत दोनों दलों के कई बड़े नेता चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे।
बैहना वार्ड के लोगों द्वारा नगर निगम से बाहर किए जाने की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार किए जाने का मामला भी इस बार चर्चा में रहा। वार्ड के सभी प्रत्याशियों ने नाम वापस लेने का फैसला किया, जिससे वहां चुनाव नहीं हुआ। नगर निगम चुनाव के नतीजों का असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।