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Mandi News: बंदरों का आतंक, छतों को पहुंचा रहे नुकसान
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घरों में घुसकर उठा रहे सामान
लोगों में दहशत का माहौल, फसलों को भी किया जा रहा तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। धर्मपुर के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों बंदरों का आतंक चरम पर है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लोग अब अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। बंदरों के झुंड न केवल रिहायशी मकानों की छतों को उखाड़ रहे हैं, बल्कि मौका मिलते ही कमरों के भीतर घुसकर खाने-पीने और अन्य कीमती सामान को तहस-नहस कर रहे हैं।
बंदरों के डर से अब किसानों ने खेतों की ओर रुख करना कम कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के आतंक के कारण उन्होंने खेतों में फसल बीजना तक बंद कर दिया है। कड़ी मेहनत के बाद उगाई गई फसलों को बंदर चंद मिनटों में बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
बंदरों की आक्रामकता का शिकार अब तक कई स्थानीय लोग हो चुके हैं। बंदरों के हमले में बबली देवी, गीता देवी, माया देवी, राकेश कुमार, ओम प्रकाश, ध्यान सिंह, भीम सिंह, सतीश कुमार और प्रवीण कुमार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों का कहना है कि बंदर अचानक हमला करते हैं, जिससे बचने का समय ही नहीं मिलता। स्थानीय जनता ने प्रदेश सरकार और वन विभाग के प्रति कड़ा रोष व्यक्त करते हुए समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर विभाग ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो स्थिति और भी भयानक हो सकती है।
बाक्स
वन परिक्षेत्र अधिकारी, धर्मपुर पवन कुमार का कहना है कि विभाग को इस समस्या की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। सरकार की योजना के तहत बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें बुलाई गई थीं, जो किन्हीं कारणों से अभी तक नहीं पहुंच पाई हैं। विभाग फिर से उनसे संपर्क साध रहा है ताकि जल्द से जल्द टीमों को बुलाकर लोगों को राहत दिलाई जा सके।
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लोगों में दहशत का माहौल, फसलों को भी किया जा रहा तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। धर्मपुर के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों बंदरों का आतंक चरम पर है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि लोग अब अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। बंदरों के झुंड न केवल रिहायशी मकानों की छतों को उखाड़ रहे हैं, बल्कि मौका मिलते ही कमरों के भीतर घुसकर खाने-पीने और अन्य कीमती सामान को तहस-नहस कर रहे हैं।
बंदरों के डर से अब किसानों ने खेतों की ओर रुख करना कम कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के आतंक के कारण उन्होंने खेतों में फसल बीजना तक बंद कर दिया है। कड़ी मेहनत के बाद उगाई गई फसलों को बंदर चंद मिनटों में बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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बंदरों की आक्रामकता का शिकार अब तक कई स्थानीय लोग हो चुके हैं। बंदरों के हमले में बबली देवी, गीता देवी, माया देवी, राकेश कुमार, ओम प्रकाश, ध्यान सिंह, भीम सिंह, सतीश कुमार और प्रवीण कुमार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों का कहना है कि बंदर अचानक हमला करते हैं, जिससे बचने का समय ही नहीं मिलता। स्थानीय जनता ने प्रदेश सरकार और वन विभाग के प्रति कड़ा रोष व्यक्त करते हुए समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर विभाग ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो स्थिति और भी भयानक हो सकती है।
बाक्स
वन परिक्षेत्र अधिकारी, धर्मपुर पवन कुमार का कहना है कि विभाग को इस समस्या की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। सरकार की योजना के तहत बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें बुलाई गई थीं, जो किन्हीं कारणों से अभी तक नहीं पहुंच पाई हैं। विभाग फिर से उनसे संपर्क साध रहा है ताकि जल्द से जल्द टीमों को बुलाकर लोगों को राहत दिलाई जा सके।