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Digital Arrest: हिमाचल में सेवानिवृत्त सैनिक से 98 लाख की ठगी, 15 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट; ऐसे किया गुमराह

संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 09 Jan 2026 06:00 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश में सेवानिवृत्त सैनिक से 98 लाख रुपये की ठगी हुई है। सेवानिवृत्त सैनिक को ठगों ने 15 से 30 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। क्या होता है ये डिजिटल अरेस्ट अगर आपको नहीं पता है तो खबर को विस्तार से पढ़ें और ठगी का शिकार होने से खुद को बचाएं...

Retired soldier in Himachal defrauded of Rs 98 lakh kept under digital arrest for 15 days
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 98 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संलिप्तता बताकर फर्जी सीबीआई, आरबीआई और न्यायालय अधिकारी बनकर पीड़ित को डराया गया। फर्जी वीडियो कॉल से कोर्ट कार्यवाही दिखाई गई। इस संबंध में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन मध्य खंड मंडी में प्राथमिकी दर्ज की गई है। साइबर पुलिस इस मामले में तथ्य जुटा रही है।

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शिकायतकर्ता बिलासपुर का रहने वाला है और सेवानिवृत्त सैनिक हैं। शिकायतकर्ता को अज्ञात व्यक्तियों ने स्वयं को दूरसंचार विभाग, सीबीआई, आरबीआई और न्यायालय का अधिकारी बताकर फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया। ठगों ने उन्हें यह झूठी जानकारी दी कि उनके नाम पर फर्जी सिम जारी हुई है और वह एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संलिप्त हैं।

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ठगों ने पूर्व सैनिक पर मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान फर्जी वीडियो कॉल के माध्यम से कोर्ट की कार्यवाही दिखाई गई। मानसिक दबाव बनाकर विभिन्न बैंक खातों में धनराशि जमा करवाने के लिए मजबूर किया गया। शिकायतकर्ता को 15 से 30 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। आरोप है कि ठगों ने कथित गिरफ्तारी वारंट दिखाते हुए धमकी दी कि यदि इस मामले की जानकारी किसी को दी गई तो वे कभी इस केस से बाहर नहीं निकल पाएंगे और उन्हें 5 से 7 वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसके बाद एक फर्जी वीडियो कॉल के माध्यम से कोर्ट हियरिंग करवाई गई, जिसमें कथित न्यायाधीश ने शिकायतकर्ता की संपत्ति और धनराशि कोर्ट में जमा कराने के आदेश दिए।

ठगों के बताए गए विभिन्न बैंक खातों में शिकायतकर्ता ने अपनी धनराशि जमा करवाई, जिससे कुल मिलाकर लगभग 98 लाख रुपये की ठगी की गई। ठगों ने शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन से संबंधित कॉल, मैसेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जबरन डिलीट करवा दिए।

साइबर पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी ने आम जनता से अपील की है कि इस प्रकार के कॉल, वीडियो कॉल या व्हाट्सएप संदेशों से सतर्क रहें और किसी भी परिस्थिति में अपने बैंक खाते, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत सूचना नजदीकी पुलिस थाना या साइबर हेल्पलाइन को दें।

कैसे होती है यह ठगी?
आपको एक कॉल आएगी और ठग कहते हैं कि आपके नाम पर फर्जी सिम या बैंक अकाउंट खुला है, या कोई गलत पार्सल आपके नाम से पकड़ा गया है। कहते हैं कि आप डिजिटल अरेस्ट" हो गए हैं मतलब घर से बाहर मत निकलो, किसी से बात मत करो, वरना असली गिरफ्तारी हो जाएगी। यूनिफॉर्म पहने हुए फर्जी ऑफिस दिखाते हैं, फर्जी कोर्ट की सुनवाई करवाते हैं, जहां 'जज' कहता है कि जुर्माना या पैसे जमा करो। डर के मारे आप उनके बताए अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। कई दिनों तक आपको फोन पर बंधक बनाकर रखते हैं। बस यही है पैसों को ठगने का खेल। इसलिए सावधान रहें सतर्क रहें।

 

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