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Sirmaur Bus Accident: पैरापिट या क्रैश बैरियर होते तो बच जाती जानें, हर साल लापरवाही की कीमत चुका रहा सिरमौर

धर्म सिंह तोमर, नाहन (सिरमौर)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 10 Jan 2026 02:14 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में सड़क हादसे में 14 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। बता दें कि अधिकतर हिस्सों में सुरक्षा के लिए पैरापिट तक नहीं लगाए गए हैं। अगर पैरापिट होते तो शायद लोगों की जान बच जाती। पढ़ें पूरी खबर...

Sirmaur Bus Accident Parapit or crash barrier would have saved life
दुर्घटनाग्रस्त बस। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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जिला सिरमौर में सड़क हादसे हर साल लोगों की जान लेकर प्रशासनिक और तंत्र की लापरवाही को उजागर कर रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कारणों की जांच होती है, बैठकों में गंभीर चर्चाएं भी होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर उसी ढर्रे पर लौट आते हैं। लापरवाही का नतीजा यह है कि हर साल छोटे बच्चे, युवा और आम लोग अपनी कीमती जिंदगियां गंवा रहे हैं।

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स्थानीय निवासी विक्रम कुमार, रजनीश और रमन का कहना है कि जिले के उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़कें बेहद संकरी हैं और अधिकतर हिस्सों में सुरक्षा के लिए पैरापिट तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में यदि किसी वाहन का संतुलन बिगड़ता है तो उसे रोकने की कोई व्यवस्था नहीं होती और वाहन सीधे सैकड़ों मीटर गहरी खाइयों में जा गिरते हैं।
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ये भी पढ़ें- Himachal Bus Accident: सिरमौर के हरिपुरधार में ओवरलोड बस दुर्घटनाग्रस्त, हादसे में 14 लोगों की मौत; 52 घायल

लोगों का कहना है कि जिले में हर साल दर्जनों सड़क हादसे हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो सड़कों की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है और न ही खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। तीखे मोड़, कमजोर सड़कें और सुरक्षा इंतजामों की कमी हादसों का बड़ा कारण बन रही है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हादसों के बाद सिर्फ जांच और औपचारिकता तक सीमित न रहा जाए, बल्कि संवेदनशील और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सिरमौर यूं ही हर साल लापरवाही की कीमत लोगों की जान से चुकाता रहेगा।

हिमाचल में बड़े बस हादसे
9 अगस्त 2012 : चंबा में निजी बस 300 फीट गहरी खाई में गिरी। 42 सीटर बस में 100 से अधिक यात्री थे 51 की मौत व लगभग 46 जख्मी 
9 अप्रैल 2018 : नूरपूर कांगड़ा में  निजी स्कूल बस 300 फीट गहरी खाई में गिरी। 26 बच्चों एवं दो शिक्षकों समेत 28 की मौत हो गईं
20 जून 2019 : कुल्लू में निजी बस खाई में गिरी। 44 लोगों की मौत और 34 घायल  
10 जुलाई 2025 : मंडी के सरकाघाट में एक सरकारी बस गहरी खाई में गिरी। 7 लोगों की मौत और 20 जख्मी।
17 जून 2025 : मंडी में निजी बस अनियंत्रित होकर खाई में गिरी। एक की मौत, 16 घायल।
7 अक्टूबर 2025 : बिलासपुर में भूस्खलन के कारण बस मलबे में दबी। 18 लोगों की मौत।

इन कारणों से हुए हादसे
बस हादसों का कारण मुख्य रूप से खराब सड़कें और तीखे मोड़
ओवरलोडिंग, बसों की छतों पर यात्रियों का बैठना 
ड्राइवर का बस पर से नियंत्रण खो देना या स्पीड अधिक होना
भारी बारिश से भूस्खलन या सड़क का धंसना
सड़क किनारे सुरक्षा अवरोधों (क्रैश बैरियर) का अभाव।
 
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