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Rampur Bushahar News: ठियोग उत्सव में कम मानदेय देने पर जताई नाराजगी, स्थानीय कलाकारों ने खोला मोर्चा
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ठियोग उत्सव में स्थानीय कलाकारों की अनदेखी पर जताया रोष। संवाद
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अनदेखी और भेदभाव के लगाए आरोप, आगामी कार्यक्रमों का बहिष्कार करने की दी चेतावनी
प्रशासन से कलाकारों को सम्मानजनक मंच और उचित मानदेय सुनिश्चित करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
ठियोग उत्सव का 15-16 अगस्त को आयोजन हुआ। स्थानीय लोक कलाकारों और संगीतकारों ने मानदेय को कम करने पर चिंता जताई है। इस निर्णय के खिलाफ कलाकारों ने नगर परिषद के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। उत्सव का बहिष्कार करने वाले स्थानीय कलाकारों ने ठियोग में प्रेसवार्ता कर नगर परिषद पर कलाकारों की अनदेखी, भेदभाव और उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए। साथ ही आगामी कार्यक्रमों का बहिष्कार करने की चेतावनी दी। कलाकारों ने कहा कि मानदेय में कटौती का निर्णय स्थानीय कलाकारों को हतोत्साहित करने वाला है। उनका कहना है कि लोक कलाकार लंबे समय से अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं लेकिन नगर परिषद की ओर से उनके योगदान को उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा। स्थानीय कलाकार श्याम सिंगटा, मनोहर खाची, राज शर्मा, प्रवीण कुमार, सुरेश शर्मा, राजेश गंधर्व, रेशमा पंडार, निशा गंधर्व, राजेश वर्मा सहित अन्य ने आरोप लगाया कि उत्सव में स्थानीय कलाकारों को प्राइम टाइम में प्रस्तुति देने का अवसर नहीं दिया जाता, जबकि स्थानीय कलाकारों का यह हक है। कलाकारों को उचित मंच और समय न मिलना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने मेला कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कमेटी में पिछले 20 वर्षों से कई सदस्य लगातार बने हुए हैं और बार-बार वही पुराने चेहरे निर्णय प्रक्रिया में नजर आते हैं। कहीं न कहीं उत्सव के स्तर में गिरावट के लिए यह व्यवस्था भी जिम्मेदार है। कलाकारों ने मेला कमेटी में नए लोगों और कलाकारों को शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कलाकारों से जुड़े कार्यक्रमों और उनके मानदेय सहित अन्य नियम तय करने में स्थानीय कलाकारों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। कमेटी में शामिल कलाकारों ने स्थानीय कलाकारों की समस्याओं और मांगों के समर्थन में आवाज नहीं उठाई। कलाकारों ने कहा कि जब कलाकारों के अधिकार और सम्मान का सवाल है, तो उन्हें एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। कलाकारों ने चेतावनी दी कि यदि नगर परिषद का रवैया नहीं बदला और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले कार्यक्रमों का भी सामूहिक बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से कलाकारों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान करने और उत्सवों में स्थानीय कलाकारों को सम्मानजनक मंच और उचित मानदेय सुनिश्चित करने की मांग की है।
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प्रशासन से कलाकारों को सम्मानजनक मंच और उचित मानदेय सुनिश्चित करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
ठियोग उत्सव का 15-16 अगस्त को आयोजन हुआ। स्थानीय लोक कलाकारों और संगीतकारों ने मानदेय को कम करने पर चिंता जताई है। इस निर्णय के खिलाफ कलाकारों ने नगर परिषद के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। उत्सव का बहिष्कार करने वाले स्थानीय कलाकारों ने ठियोग में प्रेसवार्ता कर नगर परिषद पर कलाकारों की अनदेखी, भेदभाव और उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए। साथ ही आगामी कार्यक्रमों का बहिष्कार करने की चेतावनी दी। कलाकारों ने कहा कि मानदेय में कटौती का निर्णय स्थानीय कलाकारों को हतोत्साहित करने वाला है। उनका कहना है कि लोक कलाकार लंबे समय से अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं लेकिन नगर परिषद की ओर से उनके योगदान को उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा। स्थानीय कलाकार श्याम सिंगटा, मनोहर खाची, राज शर्मा, प्रवीण कुमार, सुरेश शर्मा, राजेश गंधर्व, रेशमा पंडार, निशा गंधर्व, राजेश वर्मा सहित अन्य ने आरोप लगाया कि उत्सव में स्थानीय कलाकारों को प्राइम टाइम में प्रस्तुति देने का अवसर नहीं दिया जाता, जबकि स्थानीय कलाकारों का यह हक है। कलाकारों को उचित मंच और समय न मिलना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने मेला कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कमेटी में पिछले 20 वर्षों से कई सदस्य लगातार बने हुए हैं और बार-बार वही पुराने चेहरे निर्णय प्रक्रिया में नजर आते हैं। कहीं न कहीं उत्सव के स्तर में गिरावट के लिए यह व्यवस्था भी जिम्मेदार है। कलाकारों ने मेला कमेटी में नए लोगों और कलाकारों को शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कलाकारों से जुड़े कार्यक्रमों और उनके मानदेय सहित अन्य नियम तय करने में स्थानीय कलाकारों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। कमेटी में शामिल कलाकारों ने स्थानीय कलाकारों की समस्याओं और मांगों के समर्थन में आवाज नहीं उठाई। कलाकारों ने कहा कि जब कलाकारों के अधिकार और सम्मान का सवाल है, तो उन्हें एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। कलाकारों ने चेतावनी दी कि यदि नगर परिषद का रवैया नहीं बदला और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले कार्यक्रमों का भी सामूहिक बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से कलाकारों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान करने और उत्सवों में स्थानीय कलाकारों को सम्मानजनक मंच और उचित मानदेय सुनिश्चित करने की मांग की है।