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Rampur Bushahar News: ठंड के कारण बॉक्सों से बाहर नहीं निकल रहीं मधुमक्खियां, प्रभावित हो रहा परागण
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अधिक तापमान गिरने से मधुमक्खियों के मरने का खतरा, विशेषज्ञ ने दी बचाव की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। क्षेत्र में पिछले तीन दिन से ठंड और खराब मौसम का असर सेब के बगीचों में रखीं मधुमक्खियों पर भी देखने को मिल रहा है। सेब के बगीचों में परागण के लिए गर्म इलाकों से लाई गईं मधुमक्खियां ठंड के कारण अपने बॉक्सों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। इस कारण परागण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।दरअसल, सेब के बगीचों में फूल आने के समय परागण के लिए बाहरी राज्य से मधुमक्खियों के बॉक्स बगीचों में रखे जाते हैं। इन मधुमक्खियों को आमतौर पर मैदानी या अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों से लाया जाता है ताकि वे सेब के फूलों पर बैठकर परागण की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकें, लेकिन लगातार ठंड और बारिश के कारण मधुमक्खियां बॉक्स के अंदर ही रह रहीं और बाहर निकलकर काम नहीं कर पा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमक्खियां धूप और अपेक्षाकृत गर्म तापमान में ही सक्रिय रहती हैं। तापमान कम होने या लगातार नमी रहने की स्थिति में वे बॉक्स से बाहर नहीं निकलतीं। ऐसे में मधुमक्खी पालकों और बागवानों को उनके रखरखाव और खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब मौसम के दौरान मधुमक्खियों के बॉक्स को ठंडी हवा और बारिश से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। बॉक्स को जमीन से थोड़ा ऊंचा रखने के साथ इन पर प्लास्टिक शीट या अन्य आवरण लगाकर नमी से बचाव किया जा सकता है। इसके अलावा मधुमक्खियों के लिए चीनी का घोल या विशेष फीड उपलब्ध करवाना जरूरी होता है ताकि वे ऊर्जा प्राप्त कर सकें और कमजोर न हों।
जैसे ही मौसम साफ होगा और धूप निकलेगी, मधुमक्खियां फिर से सक्रिय होकर परागण का कार्य शुरू कर देंगी। खराब मौसम में इनके बॉक्स को पानी से बचाना जरूरी है। इनके लिए ठंड में फीडिंग की भी व्यवस्था करना जरूरी है। - डाॅ. नरेंद्र कायथ, वरिष्ठ वैज्ञानिक
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। क्षेत्र में पिछले तीन दिन से ठंड और खराब मौसम का असर सेब के बगीचों में रखीं मधुमक्खियों पर भी देखने को मिल रहा है। सेब के बगीचों में परागण के लिए गर्म इलाकों से लाई गईं मधुमक्खियां ठंड के कारण अपने बॉक्सों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। इस कारण परागण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।दरअसल, सेब के बगीचों में फूल आने के समय परागण के लिए बाहरी राज्य से मधुमक्खियों के बॉक्स बगीचों में रखे जाते हैं। इन मधुमक्खियों को आमतौर पर मैदानी या अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों से लाया जाता है ताकि वे सेब के फूलों पर बैठकर परागण की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकें, लेकिन लगातार ठंड और बारिश के कारण मधुमक्खियां बॉक्स के अंदर ही रह रहीं और बाहर निकलकर काम नहीं कर पा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमक्खियां धूप और अपेक्षाकृत गर्म तापमान में ही सक्रिय रहती हैं। तापमान कम होने या लगातार नमी रहने की स्थिति में वे बॉक्स से बाहर नहीं निकलतीं। ऐसे में मधुमक्खी पालकों और बागवानों को उनके रखरखाव और खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब मौसम के दौरान मधुमक्खियों के बॉक्स को ठंडी हवा और बारिश से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। बॉक्स को जमीन से थोड़ा ऊंचा रखने के साथ इन पर प्लास्टिक शीट या अन्य आवरण लगाकर नमी से बचाव किया जा सकता है। इसके अलावा मधुमक्खियों के लिए चीनी का घोल या विशेष फीड उपलब्ध करवाना जरूरी होता है ताकि वे ऊर्जा प्राप्त कर सकें और कमजोर न हों।
जैसे ही मौसम साफ होगा और धूप निकलेगी, मधुमक्खियां फिर से सक्रिय होकर परागण का कार्य शुरू कर देंगी। खराब मौसम में इनके बॉक्स को पानी से बचाना जरूरी है। इनके लिए ठंड में फीडिंग की भी व्यवस्था करना जरूरी है। - डाॅ. नरेंद्र कायथ, वरिष्ठ वैज्ञानिक
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