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Rampur Bushahar News: गुठलीदार फलों से आर्थिकी मजबूत कर रहे बागवान
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नित्थर में जापानी, अखरोट, चेरी और ब्लू चेरी का कर रहे उत्पादन
युवा सरकारी नौकरी के पीछे न भागकर बागवानी में आजमा रहे किस्मत
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)। नित्थर क्षेत्र के कई इलाकों में लाखों सेब की पेटियों का उत्पादन होता है और गुठलीदार फलों का उत्पादन करके भी बागवान अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। नित्थर के ऊपरी क्षेत्र एडशी, बुआई, शिल्लाबाग, लोट, दुराह, कुठेड़ और पलेही के कई इलाकों में सेब का भारी उत्पादन होता है। यहां के युवा सरकारी नौकरी के पीछे न भागकर बागवानी में अपनी किस्मत आजमा कर आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं।
नित्थर पंचायत के शिल्लाबाग के युवा बागवान भूपिंद्र चौहान का कहना है कि नित्थर के ऊपरी क्षेत्रों में सेब के साथ युवा बागवान और कई फलों को उगा रहे हैं। जापानी फल, अखरोट, चेरी और ब्लू चेरी का उत्पादन कर रहे हैं। गुठलीदार फलों के अलावा सब्जियों को भी उगा रहे हैं। कहा कि बागवानों ने एक टेबल स्पून से एक किलो काला जीरे को उगाया है। इससे यह सिद्ध होता है कि यहां पर काला जीरा होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा आलू, अरबी, मटर, फ्रासबीन, गोभी और शहद का उत्पादन कर किसान और बागवान अपनी आर्थिकी सुदृढ़ कर रहे हैं। नित्थर क्षेत्र के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाला शहद दवाइयों के लिए बहुत ही उपयोगी है। इसके अलावा काला जीरा भी यहां पर उगाया जा सकता है, लेकिन नित्थर के एडशी और शिल्लाबाग में न तो सड़क की सुविधा है और न ही पानी। पीने का पानी सात दिन के बाद आता है। सड़क न होने से सेब मुख्य सड़क तक पहुंचाने में बागवानों को बहुत ज्यादा खर्च करना पड़ता है।
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युवा सरकारी नौकरी के पीछे न भागकर बागवानी में आजमा रहे किस्मत
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)। नित्थर क्षेत्र के कई इलाकों में लाखों सेब की पेटियों का उत्पादन होता है और गुठलीदार फलों का उत्पादन करके भी बागवान अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। नित्थर के ऊपरी क्षेत्र एडशी, बुआई, शिल्लाबाग, लोट, दुराह, कुठेड़ और पलेही के कई इलाकों में सेब का भारी उत्पादन होता है। यहां के युवा सरकारी नौकरी के पीछे न भागकर बागवानी में अपनी किस्मत आजमा कर आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं।
नित्थर पंचायत के शिल्लाबाग के युवा बागवान भूपिंद्र चौहान का कहना है कि नित्थर के ऊपरी क्षेत्रों में सेब के साथ युवा बागवान और कई फलों को उगा रहे हैं। जापानी फल, अखरोट, चेरी और ब्लू चेरी का उत्पादन कर रहे हैं। गुठलीदार फलों के अलावा सब्जियों को भी उगा रहे हैं। कहा कि बागवानों ने एक टेबल स्पून से एक किलो काला जीरे को उगाया है। इससे यह सिद्ध होता है कि यहां पर काला जीरा होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा आलू, अरबी, मटर, फ्रासबीन, गोभी और शहद का उत्पादन कर किसान और बागवान अपनी आर्थिकी सुदृढ़ कर रहे हैं। नित्थर क्षेत्र के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाला शहद दवाइयों के लिए बहुत ही उपयोगी है। इसके अलावा काला जीरा भी यहां पर उगाया जा सकता है, लेकिन नित्थर के एडशी और शिल्लाबाग में न तो सड़क की सुविधा है और न ही पानी। पीने का पानी सात दिन के बाद आता है। सड़क न होने से सेब मुख्य सड़क तक पहुंचाने में बागवानों को बहुत ज्यादा खर्च करना पड़ता है।
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