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Rampur Bushahar News: रूठे हुए हैं मेघ, संकट में बगीचे और खेत
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शीघ्र पर्याप्त बर्फबारी नहीं हुई, तो सेब की फसल पर संकट
गेहूं की बुआई का कार्य लटका, लहसुन, प्याज की फसल पर भी संकट
तीन महीने से टकटकी लगाए बागवान, अब परेशानी के दौर से गुर रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल(रोहड़ू)।
अपर शिमला में आखिरी बार 26 अगस्त को बारिश हुई थी। इसके बाद लगातार सूखे का दौर चला हुआ है। बीते साढ़े चार महीने से आसमान से एक बूंद पानी नहीं टपकी है। मेघ रूठे हुए हैं, जिससे किसानों-बागवानों के खेत और बगीचों में सूखे से संकट पैदा हो गया है। किसान और बागवान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं कि अब राहत बरसेगी और उनके खेत-बगीचों में हरियाली लौटेगी। लोगों को नए साल में बारिश-बर्फबारी की उम्मीद थी। जनवरी का पहला हफ्ता भी बीत चुका है, लेकिन अभी तक बारिश-बर्फबारी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। साढ़े चार महीने से चल रहे लंबे सूखे ने बागवानों को इस चिंता में डाल दिया है कि कहीं कृषि और बागवानी का संतुलन ही न बिगड़ जाए। आम तौर पर दिसंबर के अंत तक बागवान बगीचों में तौलिये लगाने के साथ खाद डालने का कार्य पूरा कर लेते थे, लेकिन इस बार लगातार चल रहे सूखे की वजह से बगीचों के यह महत्वपूर्ण कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। दिसंबर से जनवरी के पहले पखवाड़े यानी पौष की बर्फबारी को ही सेब के लिए उचित माना गया है। इस समय के बीच बर्फबारी होने से जहां जमीन को पर्याप्त नमी मिल जाती है, वहीं सेब की फसल के लिए आवश्यक डेढ़ से दो हजार चिलिंग ऑवर्स भी पूरे हो जाते हैं। यदि शीघ्र पर्याप्त बर्फबारी न हुई, तो आगामी सेब की फसल पर संकट पैदा होना स्वाभाविक है। इसके अलावा इन दिनों बागवान सेब और अन्य फलों की नई प्लांटेशन भी करते हैं, लेकिन खुश्क हो चुकी जमीन में प्लांटेशन के लिए गड्ढे करने का कार्य भी गति नहीं पकड़ पा रहा है। बागवानी के अतिरिक्त कृषि पर भी सूखे की मार पड़ रही है। शुष्क हो चुकी जमीन के चलते एक तरफ जहां गेहूं की बुआई का कार्य लटका हुआ है, वहीं जिन लोगों ने लहसुन, प्याज आदि की फसल लगा दी है, उन पर भी सूखे के चलते संकट के बादल मंडरा गए हैं। बता दें कि उपमंडल चौपाल की 80 फीसदी आर्थिकी बागवानी और कृषि पर ही निर्भर है। यदि जल्द ही मौसम कृषि बागवानी के लिए अनुकूल न हुआ, तो क्षेत्र की आर्थिकी पर इसका बहुत बड़ा असर पड़ सकता है।
बारिश होने तक रोकें तौलिये लगाने का काम
बागवान विभाग चौपाल के विषयवाद विशेषज्ञ सुरेंद्र जस्टा ने बागवानों को सलाह दी है कि बारिश होने तक तौलिये लगाने का कार्य रोक लें। जब तौलिये लगाएं, तो पौधे की जड़ में ड्रेंसिंग जरूर करें। अभी प्रूनिंग का कार्य किया जा सकता है, क्योंकि इस समय पौधे सुप्त अवस्था में जा चुके होते हैं। इस कार्य में यह ध्यान जरूर रखें कि टहनियों की कटिंग के बाद पेस्ट जरूर लगाएं। बगीचों में गोबर की खाद भी डाली जा सकती है। साथ ही सुझाव दिया कि यदि सेब के पौधों में एक विशेष किस्म का कीड़ा वूली एप्पल एफिड नजर आए, तो डर्मेट कीट नाशक का छिड़काव करें। उन्होंने बागवानों से विशेष आग्रह किया है की बगीचों में काटी गई टहनियों को न जलाएं, बल्कि इनकी कटिंग कर इन्हें गोबर के साथ गड्ढे में दबा कर इसकी खाद बनाएं ।
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तीन महीने से टकटकी लगाए बागवान, अब परेशानी के दौर से गुर रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल(रोहड़ू)।
अपर शिमला में आखिरी बार 26 अगस्त को बारिश हुई थी। इसके बाद लगातार सूखे का दौर चला हुआ है। बीते साढ़े चार महीने से आसमान से एक बूंद पानी नहीं टपकी है। मेघ रूठे हुए हैं, जिससे किसानों-बागवानों के खेत और बगीचों में सूखे से संकट पैदा हो गया है। किसान और बागवान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं कि अब राहत बरसेगी और उनके खेत-बगीचों में हरियाली लौटेगी। लोगों को नए साल में बारिश-बर्फबारी की उम्मीद थी। जनवरी का पहला हफ्ता भी बीत चुका है, लेकिन अभी तक बारिश-बर्फबारी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। साढ़े चार महीने से चल रहे लंबे सूखे ने बागवानों को इस चिंता में डाल दिया है कि कहीं कृषि और बागवानी का संतुलन ही न बिगड़ जाए। आम तौर पर दिसंबर के अंत तक बागवान बगीचों में तौलिये लगाने के साथ खाद डालने का कार्य पूरा कर लेते थे, लेकिन इस बार लगातार चल रहे सूखे की वजह से बगीचों के यह महत्वपूर्ण कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। दिसंबर से जनवरी के पहले पखवाड़े यानी पौष की बर्फबारी को ही सेब के लिए उचित माना गया है। इस समय के बीच बर्फबारी होने से जहां जमीन को पर्याप्त नमी मिल जाती है, वहीं सेब की फसल के लिए आवश्यक डेढ़ से दो हजार चिलिंग ऑवर्स भी पूरे हो जाते हैं। यदि शीघ्र पर्याप्त बर्फबारी न हुई, तो आगामी सेब की फसल पर संकट पैदा होना स्वाभाविक है। इसके अलावा इन दिनों बागवान सेब और अन्य फलों की नई प्लांटेशन भी करते हैं, लेकिन खुश्क हो चुकी जमीन में प्लांटेशन के लिए गड्ढे करने का कार्य भी गति नहीं पकड़ पा रहा है। बागवानी के अतिरिक्त कृषि पर भी सूखे की मार पड़ रही है। शुष्क हो चुकी जमीन के चलते एक तरफ जहां गेहूं की बुआई का कार्य लटका हुआ है, वहीं जिन लोगों ने लहसुन, प्याज आदि की फसल लगा दी है, उन पर भी सूखे के चलते संकट के बादल मंडरा गए हैं। बता दें कि उपमंडल चौपाल की 80 फीसदी आर्थिकी बागवानी और कृषि पर ही निर्भर है। यदि जल्द ही मौसम कृषि बागवानी के लिए अनुकूल न हुआ, तो क्षेत्र की आर्थिकी पर इसका बहुत बड़ा असर पड़ सकता है।
बारिश होने तक रोकें तौलिये लगाने का काम
बागवान विभाग चौपाल के विषयवाद विशेषज्ञ सुरेंद्र जस्टा ने बागवानों को सलाह दी है कि बारिश होने तक तौलिये लगाने का कार्य रोक लें। जब तौलिये लगाएं, तो पौधे की जड़ में ड्रेंसिंग जरूर करें। अभी प्रूनिंग का कार्य किया जा सकता है, क्योंकि इस समय पौधे सुप्त अवस्था में जा चुके होते हैं। इस कार्य में यह ध्यान जरूर रखें कि टहनियों की कटिंग के बाद पेस्ट जरूर लगाएं। बगीचों में गोबर की खाद भी डाली जा सकती है। साथ ही सुझाव दिया कि यदि सेब के पौधों में एक विशेष किस्म का कीड़ा वूली एप्पल एफिड नजर आए, तो डर्मेट कीट नाशक का छिड़काव करें। उन्होंने बागवानों से विशेष आग्रह किया है की बगीचों में काटी गई टहनियों को न जलाएं, बल्कि इनकी कटिंग कर इन्हें गोबर के साथ गड्ढे में दबा कर इसकी खाद बनाएं ।
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