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पर्वतीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती की अपार संभावनाएं : यशबीर नेगी
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गुमना गांव में किसानों को किया बताया औषधीय पौधों का महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। पर्वतीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। उपमंडल रोहड़ू के गुमना गांव में जागरूकता कार्यक्रम में शिव औषधीय पौध उत्पादक सोसायटी के सदस्य यशबीर सिंह नेगी ने यह बात कही। कार्यक्रम के दौरान शिव औषधीय पौध उत्पादक सोसायटी ने किसानों को औषधीय पौधे वितरित किए। किसानों को मुख्य रूप से अतीश, सुगंधवाला, चंदन और गुड़हल जैसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधे दिए गए। यशबीर सिंह नेगी ने किसानों को औषधीय पौधों के औषधीय, आर्थिक एवं व्यावसायिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, संरक्षण एवं विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। कार्यक्रम में शिशपाल धोटा ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने बताया कि समिति की ओर से समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और लघु सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को औषधीय खेती के प्रति जागरूक कर बड़े स्तर पर इसकी खेती को प्रोत्साहित किया जा सके। नारायण औषधीय पौध उत्पादक सोसायटी के प्रधान सुनील मेहता को भी विभिन्न औषधीय पौधे प्रदान किए गए। इस दौरान किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने और औषधीय खेती को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा की गई। सुनील मेहता ने कहा कि किसानों को सेब की पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती के प्रति भी जागरूक करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में औषधीय पौधों की मांग लगातार बढ़ेगी, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय के नए साधन विकसित होंगे।
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रोहड़ू। पर्वतीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। उपमंडल रोहड़ू के गुमना गांव में जागरूकता कार्यक्रम में शिव औषधीय पौध उत्पादक सोसायटी के सदस्य यशबीर सिंह नेगी ने यह बात कही। कार्यक्रम के दौरान शिव औषधीय पौध उत्पादक सोसायटी ने किसानों को औषधीय पौधे वितरित किए। किसानों को मुख्य रूप से अतीश, सुगंधवाला, चंदन और गुड़हल जैसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधे दिए गए। यशबीर सिंह नेगी ने किसानों को औषधीय पौधों के औषधीय, आर्थिक एवं व्यावसायिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, संरक्षण एवं विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। कार्यक्रम में शिशपाल धोटा ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने बताया कि समिति की ओर से समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और लघु सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को औषधीय खेती के प्रति जागरूक कर बड़े स्तर पर इसकी खेती को प्रोत्साहित किया जा सके। नारायण औषधीय पौध उत्पादक सोसायटी के प्रधान सुनील मेहता को भी विभिन्न औषधीय पौधे प्रदान किए गए। इस दौरान किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने और औषधीय खेती को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा की गई। सुनील मेहता ने कहा कि किसानों को सेब की पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती के प्रति भी जागरूक करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में औषधीय पौधों की मांग लगातार बढ़ेगी, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय के नए साधन विकसित होंगे।