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Rampur Bushahar News: प्लांट हेल्थ क्लीनिक दो साल से बंद, उपकरण धूल फांक रहे

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 11:41 PM IST
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Plant health clinic closed for two years, equipment gathering dust
बागवान मिशन के तहत स्थानित रोहडू में बंद पड़ा प्लांट हैल्थ् क्लीनिक
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परियोजना खत्म होते ही ठप हुआ क्लीनिक का संचालन
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बीमारियों की समय पर पहचान न होने से फसल पर असर
बागवानों को जांच के लिए भटकना पड़ रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बागवानी मिशन के तहत वर्ष 2017 में बड़े दावों के साथ शुरू किया गया प्लांट हेल्थ क्लीनिक आज सरकारी उदासीनता का शिकार हो गया है। सेब बागवानों को आधुनिक जांच सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित केंद्र करीब दो वर्षों से बंद है। हालात यह है कि जहां कभी वैज्ञानिक जांच होती थी, वहां अब महंगे उपकरण धूल फांक रहे हैं।
इस क्लीनिक में सेब के पौधों में लगने वाली बीमारियों जैसे अल्टरनेरिया, मार्सोनिना, माइट और अन्य रोगों की सटीक जांच की जाती थी। इसके साथ ही पत्तों में पोषक तत्वों की कमी का परीक्षण कर बागवानों को वैज्ञानिक सलाह दी जाती थी। इससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती थी। परियोजना समाप्त होते ही तकनीशियन का पद खाली हो गया और पूरा सिस्टम ठप हो गया।
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बागवानों का सवाल है कि जब इस सुविधा की शुरुआत की गई थी, तो इसके स्थायी संचालन के लिए कोई ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई। बागवान राकेश चौहान, चंद्र ठाकुर और विरेंद्र सिंह का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई इस लैब का बंद होना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है।
क्लीनिक बंद होने से बागवानों को अब छोटी-छोटी जांच के लिए अन्य स्थानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे समय और पैसे की बर्बादी हो रही है। समय पर बीमारी की पहचान न होने से फसल पर भी असर पड़ रहा है। बागवानों का कहना है कि सरकार जमीनी स्तर पर उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है और योजनाएं शुरू होने के कुछ समय बाद ही ठप हो जाती हैं। उन्होंने मांग की है कि क्लीनिक को जल्द दोबारा शुरू किया जाए।
क्लीनिक का संचालन पहले केंद्र प्रायोजित बागवानी परियोजना के तहत किया जा रहा था। परियोजना बंद होने के बाद पिछले करीब दो वर्षों से यहां कोई कर्मचारी तैनात नहीं है, जिसके चलते जांच कार्य पूरी तरह बंद है।
-डॉ. अश्विनी चौहान, एसएमएस, उद्यान विभाग
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