हिमाचल: एसई के पदोन्नति लाभ नहीं दिए, हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्ति के दिन अतिरिक्त सचिव के रोके वित्तीय लाभ
प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना और वरिष्ठता सूची में हेरफेर कर सेवानिवृत्त कर्मचारी को पदोन्नति के लाभ से वंचित रखने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जलशक्ति विभाग के अतिरिक्त सचिव महीपाल वर्मा के सेवानिवृत्ति के दिन वित्तीय लाभों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। पढ़ें हाईकोर्ट के बड़े फैसले...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आदेशों की अवहेलना और वरिष्ठता सूची में कथित हेरफेर कर सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता (तत्कालीन एक्सईएन) को पदोन्नति के लाभ से वंचित रखने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए जलशक्ति विभाग के अतिरिक्त सचिव महीपाल वर्मा के सेवानिवृत्ति के दिन वित्तीय लाभों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन न करना और निष्पादन याचिका लंबित रहने के दौरान वरिष्ठता सूची में बदलाव कर याचिकाकर्ता को लाभ से वंचित करना गंभीर मामला है।
हाईकोर्ट ने ये कहा
अदालत ने आदेश दिया कि जब तक याचिकाकर्ता को देय राशि का भुगतान कर उसका डिमांड ड्राफ्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक अतिरिक्त सचिव के सेवानिवृत्ति लाभ जारी न किए जाएं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को 7 मार्च 2024 से 28 फरवरी 2025 तक यानी उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि तक अधीक्षण अभियंता (सिविल) के पद के सभी वित्तीय लाभों की गणना कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को निर्धारित की गई है।
कोर्ट ने 29 मार्च 2022 को सभी लाभ देने का दिया था आदेश
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 29 मार्च 2022 के फैसले में याचिकाकर्ता भूषण लाल शर्मा को वरिष्ठता और सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद ढाई वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी विभाग ने आदेशों का पालन नहीं किया। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह भी आया कि 18 मार्च 2025 को जारी अंतिम वरिष्ठता सूची में याचिकाकर्ता की पदोन्नति तिथि 28 दिसंबर 2015 से बदलकर 27 जून 2016 कर दी गई, जिससे उन्हें अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जलशक्ति विभाग में अधीक्षण अभियंता का नया पद सृजित होने के बावजूद याचिकाकर्ता को पदोन्नत नहीं किया गया और वे 28 फरवरी 2025 को बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो गए। उल्लेखनीय है कि 31 जुलाई को सुनवाई के दिन ही अतिरिक्त सचिव महीपाल वर्मा भी सेवानिवृत्त हो गए थे।
डे-बोर्डिंग स्कूल और हैलीपोर्ट निर्माण का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर लगी रोक को हटाया
प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग को बड़ी राहत देते हुए 5 करोड़ रुपये के कंपोजिट टेंडर प्रक्रिया पर लगी अंतरिम रोक हटा दी है। रोक हटाए जाने के बाद सरकार की दो प्रमुख परियोजनाएं जिला हमीरपुर के कांगू स्थित राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल का निर्माण और जिला ऊना री तहसील रोड़ा में हेलीपोर्ट निर्माण के टेंडर आवंटित करने का रास्ता साफ हो गया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 3 और 9 जुलाई को जारी अपने आदेशों को वापस ले लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इससे पहले अपने अंतरिम आदेशों के तहत प्रोजेक्ट्स की तकनीकी और वित्तीय बोलियां खोलने पर रोक लगा दी थी।
अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष लोक निर्माण विभाग के सचिव की ओर से 18 जुलाई को पारित आदेश की प्रति पेश की। सरकार की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार कर लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि 5 करोड़ रुपये के मूल्य वाले कार्यों के लिए कंपोजिट टेंडर जारी करना पूरी तरह से तर्कसंगत और वैध है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इससे अदालत के आदेश का उद्देश्य विफल हो रहा है। इसके बाद कोर्ट ने 3 जुलाई को टेंडर की बोलियां खोलने पर रोक लगा दी थी।सरकार की ओर से बताया था कि 7 जुलाई 2026 को याचिकाकर्ता एसोसिएशन को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया था, जिसके बाद 9 जुलाई को कोर्ट ने रोक का दायरा बढ़ाते हुए डे-बोर्डिंग स्कूल और हेलीपोर्ट के टेंडर भी रोक दिए थे।
पदोन्नति में दिव्यांग आरक्षण पर हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब
प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। राज्य सरकार व अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वर्तमान में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित पदों की जो स्थिति है, उसे अगली सुनवाई तक जैसा है, वैसा ही बनाए रखा जाए। इसके साथ ही राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। यह मामला दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित है। खंडपीठ ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों व सेवाओं में दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने से जुड़े मुख्य सचिव की दिशा-निर्देशों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम सुनवाई की। याचिकाकर्ता मनोज कुमार ने राज्य के मुख्य सचिव के उन निर्देशों की वैधता और सांविधानिकता को चुनौती दी है, जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 2(आर) के तहत परिभाषित दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए जारी किए गए थे।
ट्राउट मछली संरक्षण : बिजली प्रोजेक्टों को छोड़ना होगा 15 फीसदी न्यूनतम पानी
प्रदेश हाईकोर्ट ने नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र, ट्राउट मछली के संरक्षण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह नवंबर से मार्च के दौरान नदियों में 15 फीसदी का न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने की अनुपालन रिपोर्ट के संबंध में एक अलग हलफनामा दायर करे। राज्य सरकार को यह नया हलफनामा 30 अप्रैल को या उससे पहले अदालत में पेश करना होगा। अदालत ने कहा कि नदियों में जलविद्युत परियोजनाओं के बावजूद जलीय जीवन का अस्तित्व बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। परियोजना निर्माताओं को 15% अनिवार्य पानी का बहाव हर हाल में सुनिश्चित करना होगा।
मत्स्य पालन सहायक निदेशक मंडी के माध्यम से दायर हलफनामे के अनुसार मत्स्य अधिकारियों को नियमित रूप से पानी के बहाव का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी भी समय जलविद्युत परियोजना ने 15 फीसदी का अनिवार्य न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह नहीं छोड़ा जाता है, तो इसकी तुरंत रिपोर्ट की जाएगी। मंडी के उपायुक्त ने रिवर मॉनीटरिंग कमेटी गठित की है। 9 जून को हुई कमेटी की पहली बैठक में नदियों की स्थिति सुधारने और डि-सिल्टिंग (गाद निकालने) के ढर्रे पर चर्चा की गई। नदियों में पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाएगी। नदियों से गाद निकालने का काम हर साल 15 सितंबर से 15 अक्तूबर के बीच निर्धारित नियमों के तहत ही किया जाएगा।