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Rajasthan: जोधपुर जेल में बंद आसाराम को 13 साल बाद बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल को दी मंजूरी
Tue, 04 Aug 2026 01:41 PM IST
जोधपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: जोधपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 01:41 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को 13 साल बाद पहली बार 20 दिन की पैरोल मंजूर कर ली। अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से जताई गई आशंकाओं का कोई ठोस आधार नहीं है और सशर्त रिहाई का आदेश दिया।
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आसाराम को मिली 20 दिन की पैरोल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
जोधपुर जेल में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 87 वर्षीय आसाराम को 13 साल बाद पहली बार 20 दिन की पैरोल मिल गई है। राजस्थान हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने यह आदेश जारी करते हुए कहा कि पैरोल देने से इनकार करने के लिए प्रस्तुत की गई आशंकाओं का कोई ठोस आधार रिकॉर्ड पर नहीं है।
राज्य सरकार ने पैरोल अस्वीकार की अनुशंसा की थी
आसाराम की ओर से अधिवक्ता कालूराम भाटी और यशपाल सिंह राजपुरोहित ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पैरोल आवेदन को अस्वीकार करने की अनुशंसा की गई थी। पुलिस ने आशंका जताई थी कि पैरोल मिलने पर वह फरार हो सकता है। सरकार ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ राजस्थान के बाहर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं और गुजरात की एक अदालत भी उसे दोषी ठहरा चुकी है। सरकार ने अदालत के समक्ष यह तर्क भी रखा कि आसाराम उपचाराधीन है तथा मेडिकल अधिकारी ने पैरोल पर रिहाई के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका जताई गई।
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हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल को मंजूरी दी
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि आसाराम लगभग 13 वर्ष, एक माह और 24 दिन से जेल में है। इस दौरान उसे पहले अंतरिम जमानत भी मिली थी, लेकिन जमानत का दुरुपयोग करने, फरार होने, समाज या गवाहों को प्रभावित करने अथवा किसी को नुकसान पहुंचाने जैसी कोई घटना सामने नहीं आई। ऐसे में केवल आशंकाओं के आधार पर पैरोल से वंचित नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने सरकार की ओर से जताई गई सभी आशंकाओं को निराधार मानते हुए आसाराम को 20 दिन की पहली पैरोल मंजूर कर ली। अदालत ने आदेश दिया कि उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा 25-25 हजार रुपये के दो सक्षम जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा किया जाएगा। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उसे नियमानुसार वापस जेल में उपस्थित होना होगा।
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राज्य सरकार ने पैरोल अस्वीकार की अनुशंसा की थी
आसाराम की ओर से अधिवक्ता कालूराम भाटी और यशपाल सिंह राजपुरोहित ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पैरोल आवेदन को अस्वीकार करने की अनुशंसा की गई थी। पुलिस ने आशंका जताई थी कि पैरोल मिलने पर वह फरार हो सकता है। सरकार ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ राजस्थान के बाहर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं और गुजरात की एक अदालत भी उसे दोषी ठहरा चुकी है। सरकार ने अदालत के समक्ष यह तर्क भी रखा कि आसाराम उपचाराधीन है तथा मेडिकल अधिकारी ने पैरोल पर रिहाई के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका जताई गई।
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हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल को मंजूरी दी
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि आसाराम लगभग 13 वर्ष, एक माह और 24 दिन से जेल में है। इस दौरान उसे पहले अंतरिम जमानत भी मिली थी, लेकिन जमानत का दुरुपयोग करने, फरार होने, समाज या गवाहों को प्रभावित करने अथवा किसी को नुकसान पहुंचाने जैसी कोई घटना सामने नहीं आई। ऐसे में केवल आशंकाओं के आधार पर पैरोल से वंचित नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने सरकार की ओर से जताई गई सभी आशंकाओं को निराधार मानते हुए आसाराम को 20 दिन की पहली पैरोल मंजूर कर ली। अदालत ने आदेश दिया कि उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा 25-25 हजार रुपये के दो सक्षम जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा किया जाएगा। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उसे नियमानुसार वापस जेल में उपस्थित होना होगा।