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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में एक साल कैद, 1.20 लाख मुआवजा बरकरार
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जिला अदालत ने दोषी की अपील की खारिज, ट्रायल कोर्ट के फैसले को ठहराया सही
साल 2022 में राजगढ़ क्षेत्र का मामला, आरोपी ने निजी जरूरत के लिए उधार ली थी रकम
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को राहत देने से इन्कार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने राजगढ़ निवासी राजेश ठाकुर की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की ओर से सुनाई गई एक वर्ष के कारावास और 1.20 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा को बरकरार रखा है।
यह मामला साल 2022 को राजगढ़ क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता ओम प्रकाश ने शिकायत दायर कर कहा था कि राजेश ठाकुर ने मार्च में निजी जरूरत बताकर उससे 1.20 लाख रुपये उधार लिए थे। छह माह बाद रकम वापस मांगने पर आरोपी ने स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक का एक चेक दिया। जब चेक बैंक में लगाया तो वह अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। बाद में भेजे कानूनी नोटिस का आरोपी ने न तो जवाब दिया और न ही भुगतान किया।
इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट, राजगढ़ ने मार्च 2025 में आरोपी को दोषी करार देते हुए कारावास और मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। अब आरोपी ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि उसने केवल 50 हजार रुपये लिए थे। अदालत ने पाया कि आरोपी स्वयं चेक जारी करने, हस्ताक्षर और कानूनी नोटिस प्राप्त होने की बात स्वीकार कर चुका है। अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी यह साबित नहीं कर पाया कि चेक किसी अन्य उद्देश्य से दिया गया था।
अदालत ने माना कि निचली अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का सही मूल्यांकन किया है। ऐसे में सजा में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इसी के साथ अपील को खारिज कर दिया गया।
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साल 2022 में राजगढ़ क्षेत्र का मामला, आरोपी ने निजी जरूरत के लिए उधार ली थी रकम
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को राहत देने से इन्कार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने राजगढ़ निवासी राजेश ठाकुर की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की ओर से सुनाई गई एक वर्ष के कारावास और 1.20 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा को बरकरार रखा है।
यह मामला साल 2022 को राजगढ़ क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता ओम प्रकाश ने शिकायत दायर कर कहा था कि राजेश ठाकुर ने मार्च में निजी जरूरत बताकर उससे 1.20 लाख रुपये उधार लिए थे। छह माह बाद रकम वापस मांगने पर आरोपी ने स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक का एक चेक दिया। जब चेक बैंक में लगाया तो वह अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। बाद में भेजे कानूनी नोटिस का आरोपी ने न तो जवाब दिया और न ही भुगतान किया।
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इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट, राजगढ़ ने मार्च 2025 में आरोपी को दोषी करार देते हुए कारावास और मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। अब आरोपी ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि उसने केवल 50 हजार रुपये लिए थे। अदालत ने पाया कि आरोपी स्वयं चेक जारी करने, हस्ताक्षर और कानूनी नोटिस प्राप्त होने की बात स्वीकार कर चुका है। अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी यह साबित नहीं कर पाया कि चेक किसी अन्य उद्देश्य से दिया गया था।
अदालत ने माना कि निचली अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का सही मूल्यांकन किया है। ऐसे में सजा में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इसी के साथ अपील को खारिज कर दिया गया।