सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Sirmour News ›   court news 2

Sirmour News: अदालत

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 11:58 PM IST
विज्ञापन
court news 2
विज्ञापन
पुलिस का 10 बोतलें शराब पकड़ने
Trending Videos

का दावा फेल, कोर्ट से आरोपी बरी
- एसीजीएम कोर्ट का फैसला, स्वतंत्र गवाहों ने शराब की बरामदगी से किया इन्कार
- साल 2015 में सतौन बस स्टैंड का मामला, आरोपी के कब्जे से 10 बोतलें बरामदगी के लगे थे आरोप
- पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, सबूतों के अभाव में नहीं हो सका आरोप साबित
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। अवैध शराब रखने के 10 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी दीप चंद को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने 10 बोतलें शराब बरामदगी का दावा किया था, जबकि राज्य फोरेंसिक लैब को जांच के लिए सिर्फ एक बोतल को भेजा गया था। ऐसे में कोर्ट ने सभी तथ्यों और सबूतों का अवलोकन करने के बाद आरोपी को बरी करने का आदेश दिया।

मामला 13 सितंबर 2015 को पांवटा साहिब थाना क्षेत्र है। पुलिस ने सतौन बस स्टैंड के पास आरोपी के ढाबे में देसी शराब की 10 बोतलें बरामद करने का दावा किया था। आरोप था कि आरोपी के पास शराब रखने का कोई वैध लाइसेंस और परमिट नहीं था। इसके बाद एक्साइज एक्ट की धारा 39(1) के तहत मामला दर्ज किया। मामले में आठ गवाह पेश किए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के कई गवाह अपने बयानों से मुकर गए। स्वतंत्र गवाहों ने शराब की बरामदगी से इन्कार किया। इससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए। इसके अलावा जांच अधिकारी की ओर से केवल एक ही बोतल का सैंपल एसएफएसएल लैब जुन्गा भेजा गया। अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी के पास निर्धारित सीमा से अधिक शराब थी। कानून के अनुसार सीमित मात्रा में शराब रखना अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
--अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष के अन्य सभी साक्ष्यों को यह सिद्ध मान भी लिया जाए कि नमूना शराब की बोतल में वास्तव में देसी शराब थी, तब भी अधिकतम यही कहा जा सकता है कि आरोपी के पास 750 मिलीलीटर देसी शराब की एक बोतल पाई गई थी। अभियोजन पक्ष यह सिद्ध नहीं कर सका है कि अभियुक्त के पास निर्धारित सीमा से अधिक देसी शराब थी। इससे मामला एचपी उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 39(1) ए के दायरे में आ जाता है। तदनुसार, अभियोजन पक्ष का मामला इसी आधार पर विफल हो जाता है। इसलिए, अभियुक्त के विरुद्ध एचपी उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 39(1) के तहत आरोप विफल हो जाता है।
संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed