{"_id":"697a1c5a96ded3568900ca49","slug":"court-news-3-nahan-news-c-177-1-nhn1017-170643-2026-01-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: अदालत 3","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: अदालत 3
विज्ञापन
विज्ञापन
चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि
बरकरार, अब भुगतनी होगी सजा
- 26 मार्च 2025 को ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को सुनाई थी 3 महीने की सजा और 3.40 लाख जुर्माना
- अब सत्र न्यायालय ने दोषी की खारिज की अपील, ट्रायल कोर्ट का फैसला सही ठहराया
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायाधीश कपिल शर्मा ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ एनआई एक्ट के तहत अपराध पूरी तरह सिद्ध होता है।
मामला साल 2017 में राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का है। बैंक के अनुसार तहसील कमरऊ निवासी रामलाल ने भूमि विकास के लिए तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। लेकिन किस्तें न चुकाने पर उसने 2.36 लाख रुपये का चेक बैंक को दिया, जो अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद 26 मार्च 2025 को निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 3 महीने की सजा और 3.40 लाख जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई थी।
इसके खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। तर्क दिया कि बैंक ने उसके दिए गए खाली सुरक्षा चेक का दुरुपयोग किया है और उसने अधिकांश राशि चुका दी थी। हालांकि, न्यायालय ने फैसले में कहा कि आरोपी स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि ऋण अभी भी बकाया है। साथ ही आरोपी चेक पर अपने हस्ताक्षर से भी इन्कार नहीं कर सका।
अदालत ने कहा कि चेक कानूनी देनदारी चुकाने के लिए ही जारी किया गया था और आरोपी कानून के तहत उपलब्ध अनुमानों को तोड़ने में असफल रहा। ऐसे में निचली अदालत का निर्णय सही है और उसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है।
संवाद
Trending Videos
बरकरार, अब भुगतनी होगी सजा
- 26 मार्च 2025 को ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को सुनाई थी 3 महीने की सजा और 3.40 लाख जुर्माना
- अब सत्र न्यायालय ने दोषी की खारिज की अपील, ट्रायल कोर्ट का फैसला सही ठहराया
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायाधीश कपिल शर्मा ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ एनआई एक्ट के तहत अपराध पूरी तरह सिद्ध होता है।
मामला साल 2017 में राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का है। बैंक के अनुसार तहसील कमरऊ निवासी रामलाल ने भूमि विकास के लिए तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। लेकिन किस्तें न चुकाने पर उसने 2.36 लाख रुपये का चेक बैंक को दिया, जो अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद 26 मार्च 2025 को निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 3 महीने की सजा और 3.40 लाख जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसके खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। तर्क दिया कि बैंक ने उसके दिए गए खाली सुरक्षा चेक का दुरुपयोग किया है और उसने अधिकांश राशि चुका दी थी। हालांकि, न्यायालय ने फैसले में कहा कि आरोपी स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि ऋण अभी भी बकाया है। साथ ही आरोपी चेक पर अपने हस्ताक्षर से भी इन्कार नहीं कर सका।
अदालत ने कहा कि चेक कानूनी देनदारी चुकाने के लिए ही जारी किया गया था और आरोपी कानून के तहत उपलब्ध अनुमानों को तोड़ने में असफल रहा। ऐसे में निचली अदालत का निर्णय सही है और उसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है।
संवाद
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन