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Sirmour News: अदालत
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एक्साइज एक्ट के अवैध शराब
मामले में 9 साल बाद आरोपी बरी
- साल 2017 में राजगढ़ थाना का मामला, अदालत ने सबूतों के अभाव में सुनाया फैसला
- पुलिस ने वाहन में 10 पेटी बीयर बरामदगी का किया था दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। एक्साइज एक्ट के तहत दर्ज करीब 9 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋतु सिन्हा की अदालत ने सुनाया।
यह मामला वर्ष 2017 राजगढ़ थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक पिकअप वाहन से बड़ी मात्रा में बीयर बरामद करने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, 28 जून को सनौरा गंगहाट के पास चेकिंग के दौरान पिकअप वाहन से 10 पेटी बीयर बरामद की गई थीं। वाहन चालक सुरजीत सिंह टिक्कर निवासी के पास शराब ले जाने का कोई वैध परमिट नहीं था।
पुलिस ने इस मामले में एचपी आबकारी अधिनियम की धारा 39(1)(ए) के तहत मामला दर्ज कर चालान अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किए। अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। घटनास्थल पर ढाबा, पेट्रोल पंप और रिहायशी इलाके होने के बावजूद कोई भी स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक उसका दोष पूरी तरह साबित न हो जाए। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने सुरजीत सिंह को दोषमुक्त कर दिया।
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मामले में 9 साल बाद आरोपी बरी
- साल 2017 में राजगढ़ थाना का मामला, अदालत ने सबूतों के अभाव में सुनाया फैसला
- पुलिस ने वाहन में 10 पेटी बीयर बरामदगी का किया था दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। एक्साइज एक्ट के तहत दर्ज करीब 9 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋतु सिन्हा की अदालत ने सुनाया।
यह मामला वर्ष 2017 राजगढ़ थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक पिकअप वाहन से बड़ी मात्रा में बीयर बरामद करने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, 28 जून को सनौरा गंगहाट के पास चेकिंग के दौरान पिकअप वाहन से 10 पेटी बीयर बरामद की गई थीं। वाहन चालक सुरजीत सिंह टिक्कर निवासी के पास शराब ले जाने का कोई वैध परमिट नहीं था।
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पुलिस ने इस मामले में एचपी आबकारी अधिनियम की धारा 39(1)(ए) के तहत मामला दर्ज कर चालान अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किए। अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। घटनास्थल पर ढाबा, पेट्रोल पंप और रिहायशी इलाके होने के बावजूद कोई भी स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक उसका दोष पूरी तरह साबित न हो जाए। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने सुरजीत सिंह को दोषमुक्त कर दिया।
