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Sirmour News: अदालत
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ठेकेदार को बिना नोटिस दिए वसूली
का मुकदमा दायर करने की अनुमति
- 7.64 लाख रुपये बकाया होने का दावा, अदालत ने माना मामला तात्कालिक
- एनएच-707 निर्माण भुगतान विवाद में कोर्ट का आदेश
संवाद न्यूज एजेंजी
नाहन (सिरमौर)। राष्ट्रीय राजमार्ग-707 के निर्माण कार्य से जुड़े भुगतान विवाद में अदालत ने एक ठेकेदार को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों के खिलाफ बिना पूर्व नोटिस दिए वसूली का सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है।
मामला संत नगर निवासी कुलविंदर कौर की ओर से दायर आवेदन से जुड़ा है। आवेदक का कहना है कि एनएच-707 के निर्माण कार्य के दौरान वर्ष 2023-24 में उन्हें एक हिस्से का काम दिया गया था। काम पूरा होने के बाद खातों का अंतिम निपटारा भी कर दिया गया, लेकिन तय राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया। आवेदक के अनुसार संबंधित ठेकेदारों पर 7,64,362 रुपये की राशि बकाया है। आशंका जताई गई कि यदि मुख्य ठेकेदारों की सिक्योरिटी और भुगतान जारी कर दिया गया तो उन्हें अपनी रकम पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि यदि नोटिस अवधि का इंतजार किया गया तो संबंधित ठेकेदारों को भुगतान और सिक्योरिटी जारी हो सकती है। इससे आवेदक को नुकसान हो सकता है।
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए आवेदक को धारा 80 सीपीसी के नोटिस के बिना ही वसूली का सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी। साथ ही अंतरिम निषेधाज्ञा की याचिका दाखिल करने की भी छूट दी गई है।
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इनके पक्षों के खिलाफ मुकद्दमा
अदालत ने ठेकेदार को भारत संघ, सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नई दिल्ली, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नई दिल्ली, सीएएलए सह एसडीएम पांवटा साहिब और प्रोजेक्टर निदेशक, एनएचएआई के खिलाफ वसूली का मुकद्दमा दायर करने की अनुमति दी है।
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का मुकदमा दायर करने की अनुमति
- 7.64 लाख रुपये बकाया होने का दावा, अदालत ने माना मामला तात्कालिक
- एनएच-707 निर्माण भुगतान विवाद में कोर्ट का आदेश
संवाद न्यूज एजेंजी
नाहन (सिरमौर)। राष्ट्रीय राजमार्ग-707 के निर्माण कार्य से जुड़े भुगतान विवाद में अदालत ने एक ठेकेदार को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों के खिलाफ बिना पूर्व नोटिस दिए वसूली का सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है।
मामला संत नगर निवासी कुलविंदर कौर की ओर से दायर आवेदन से जुड़ा है। आवेदक का कहना है कि एनएच-707 के निर्माण कार्य के दौरान वर्ष 2023-24 में उन्हें एक हिस्से का काम दिया गया था। काम पूरा होने के बाद खातों का अंतिम निपटारा भी कर दिया गया, लेकिन तय राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया। आवेदक के अनुसार संबंधित ठेकेदारों पर 7,64,362 रुपये की राशि बकाया है। आशंका जताई गई कि यदि मुख्य ठेकेदारों की सिक्योरिटी और भुगतान जारी कर दिया गया तो उन्हें अपनी रकम पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि यदि नोटिस अवधि का इंतजार किया गया तो संबंधित ठेकेदारों को भुगतान और सिक्योरिटी जारी हो सकती है। इससे आवेदक को नुकसान हो सकता है।
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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए आवेदक को धारा 80 सीपीसी के नोटिस के बिना ही वसूली का सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी। साथ ही अंतरिम निषेधाज्ञा की याचिका दाखिल करने की भी छूट दी गई है।
इनके पक्षों के खिलाफ मुकद्दमा
अदालत ने ठेकेदार को भारत संघ, सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नई दिल्ली, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नई दिल्ली, सीएएलए सह एसडीएम पांवटा साहिब और प्रोजेक्टर निदेशक, एनएचएआई के खिलाफ वसूली का मुकद्दमा दायर करने की अनुमति दी है।