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Sirmour News: अदालत 4, महोदय सोलन के लिए भी ..
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चेक बाउंस में सोलन के व्यक्ति को
एक साल की कैद, 10 लाख जुर्माना
- साल 2011 में जमीन की खरीद-फिरोख्त से जुड़ा मामला, दोषी ने बयाना राशि के तौर पर 5 लाख की रकम ली थी उधार
- न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋतु सिन्हा ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
अदालत ने 15 साल पुराने चेक बाउंस के मामले में दोषी करार देते हुए एक साल कैद की सजा और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सजा पाने वाले दोषी की पहचान जिला सोलन निवासी जय सिंह के तौर पर हुई है। यह मामला साल 2011 में सोलन स्थित मौजा सेर जमीन की खरीद-फिरोख्त से जुड़ा है।
तहसील राजगढ़ निवासी देस राज शर्मा ने दोषी के खिलाफ अदालत में चेक बाउंस का केस दायर किया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि दोषी ने जनवरी 2011 में 20 लाख रुपये के मूल्य पर जमीन बेचने पर सहमति जताई। इसके बाद उसने आरोपी को बयाना राशि के तौर पर 5 लाख रुपये नकद दिए। उक्त सहमति में यह भी तय हुआ था कि शेष 15 लाख रुपये की रकम बिक्री विलेख निष्पादित किए जाने के समय दी जाएगी। करीब चार साल बाद भी आरोपी ने न तो जमीन का बिक्रीनामा निष्पादित किया और न ही बयाना राशि लौटाई। हालांकि अक्टूबर 2015 और जनवरी 2016 को आरोपी ने शिकायतकर्ता को दो पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए, लेकिन दोनों बार चेक बैंक में बाउंस हो गए।
इसी दौरान दोषी को नोटिस भेजा, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर शिकायतकर्ता की तरफ से अदालत में शिकायत दी गई थी। अब सभी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋतु सिन्हा ने फैसले में आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराया है। यह भी आदेश दिया कि मुआवजा का भुगतान न करने पर दोषी को दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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एक साल की कैद, 10 लाख जुर्माना
- साल 2011 में जमीन की खरीद-फिरोख्त से जुड़ा मामला, दोषी ने बयाना राशि के तौर पर 5 लाख की रकम ली थी उधार
- न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋतु सिन्हा ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
अदालत ने 15 साल पुराने चेक बाउंस के मामले में दोषी करार देते हुए एक साल कैद की सजा और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सजा पाने वाले दोषी की पहचान जिला सोलन निवासी जय सिंह के तौर पर हुई है। यह मामला साल 2011 में सोलन स्थित मौजा सेर जमीन की खरीद-फिरोख्त से जुड़ा है।
तहसील राजगढ़ निवासी देस राज शर्मा ने दोषी के खिलाफ अदालत में चेक बाउंस का केस दायर किया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि दोषी ने जनवरी 2011 में 20 लाख रुपये के मूल्य पर जमीन बेचने पर सहमति जताई। इसके बाद उसने आरोपी को बयाना राशि के तौर पर 5 लाख रुपये नकद दिए। उक्त सहमति में यह भी तय हुआ था कि शेष 15 लाख रुपये की रकम बिक्री विलेख निष्पादित किए जाने के समय दी जाएगी। करीब चार साल बाद भी आरोपी ने न तो जमीन का बिक्रीनामा निष्पादित किया और न ही बयाना राशि लौटाई। हालांकि अक्टूबर 2015 और जनवरी 2016 को आरोपी ने शिकायतकर्ता को दो पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए, लेकिन दोनों बार चेक बैंक में बाउंस हो गए।
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इसी दौरान दोषी को नोटिस भेजा, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर शिकायतकर्ता की तरफ से अदालत में शिकायत दी गई थी। अब सभी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋतु सिन्हा ने फैसले में आरोपी को एनआई एक्ट के तहत दोषी ठहराया है। यह भी आदेश दिया कि मुआवजा का भुगतान न करने पर दोषी को दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।