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Sirmour News: रागी जत्थों ने शबद कीर्तन से संगत की निहाल, मीठे जल की लगाईं छबीलें
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गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस श्रद्धा भाव के साथ मनाया
गुरु अर्जुन देव ने 420 साल पहले लाहौर में पाई थी शहादत, जो सबसे कठोर शहादत मानी गई
संवाद न्यूज़ एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिखों के पांचवें गुरु शहीदों के सरताज गुरु अर्जुन देव महाराज का शहीदी दिवस श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। ऐतिहासिक गुरुद्वारा दशमेश स्थान पांवटा साहिब में पिछले तीन दिनों से गुरु अर्जुन देव महाराज की शहीदी दिवस पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थों ने पहुंचकर शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यवाहक मैनेजर गुरमीत सिंह ने बताया कि सिखों के पांचवें गुरु पहले शहीद और शहीदों के सरताज गुरु अर्जुन देव महाराज का शहीदी दिवस बड़े श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। पिछले तीन दिनों से गुरुद्वारा में जारी शुभ अखंड जाप की वीरवार सुबह समाप्ति हुई। इसके उपरांत गुरुद्वारा परिसर में विशेष कीर्तन समागम आयोजित किए गए।
इसमें विभिन्न प्रांतों से पहुंचे पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थों ने शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान संगतों के लिए ठंडे-मीठे जल की छबीलें भी लगाई गईं। उन्होंने बताया कि आज से 420 साल पहले लाहौर में गुरु अर्जुन देव महाराज ने शहीदी प्राप्त की थी और गुरु अर्जुन देव महाराज को मुगलों ने गर्म तवी पर बिठाकर ऊपर से रेत डालकर शहीद किया था जो सबसे कठोर शहादत मानी गई है।
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गुरु अर्जुन देव ने 420 साल पहले लाहौर में पाई थी शहादत, जो सबसे कठोर शहादत मानी गई
संवाद न्यूज़ एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिखों के पांचवें गुरु शहीदों के सरताज गुरु अर्जुन देव महाराज का शहीदी दिवस श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। ऐतिहासिक गुरुद्वारा दशमेश स्थान पांवटा साहिब में पिछले तीन दिनों से गुरु अर्जुन देव महाराज की शहीदी दिवस पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थों ने पहुंचकर शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यवाहक मैनेजर गुरमीत सिंह ने बताया कि सिखों के पांचवें गुरु पहले शहीद और शहीदों के सरताज गुरु अर्जुन देव महाराज का शहीदी दिवस बड़े श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। पिछले तीन दिनों से गुरुद्वारा में जारी शुभ अखंड जाप की वीरवार सुबह समाप्ति हुई। इसके उपरांत गुरुद्वारा परिसर में विशेष कीर्तन समागम आयोजित किए गए।
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इसमें विभिन्न प्रांतों से पहुंचे पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थों ने शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान संगतों के लिए ठंडे-मीठे जल की छबीलें भी लगाई गईं। उन्होंने बताया कि आज से 420 साल पहले लाहौर में गुरु अर्जुन देव महाराज ने शहीदी प्राप्त की थी और गुरु अर्जुन देव महाराज को मुगलों ने गर्म तवी पर बिठाकर ऊपर से रेत डालकर शहीद किया था जो सबसे कठोर शहादत मानी गई है।