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Sirmour News: ददाहू-संगड़ाह-हरिपुरधार सड़क पर सफर सबसे भरा
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ददाहू-संगड़ाह-हरिपुरधार सड़क पर बोरली के पास गिरा डंगा जो हादसों को न्योता दे रहा है। स्रोत: जा
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संगड़ाह से हरिपुरधार तक संकरी सड़क में क्रैश बैरियर न के बराबर
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले की ददाहू–संगड़ाह–हरिपुरधार सड़क पर सफर करना जोखिमभरा है। संगड़ाह से हरिपुरधार तक 26 किलोमीटर सड़क की हालत तो और भी गंभीर है। गहरी खाइयों के बीच बनी इस संकरी सड़क पर सुरक्षा इंतजाम न के बराबर हैं। कई जगह क्रैश बैरियर और पैरापिट न होने से हर वाहन चालक जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
दरअसल, धार्मिक पर्यटन स्थल माता भंगायणी मंदिर और चूड़धार को जिला मुख्यालय से जाने लिए वाहन चालक इस सड़क का प्रयोग करते हैं। यहां से रोजाना स्कूली बच्चे, मरीज, किसान, पर्यटक और सरकारी वाहन गुजरते हैं। सड़क कई स्थानों पर इतनी संकरी है कि दो वाहन आमने-सामने निकल ही नहीं पाते। जरा-सी चूक या ब्रेक फेल होने की स्थिति में वाहन सीधे खाई में गिर सकता है।
बीते शुक्रवार को हरिपुरधार के पास बस हादसे में कई यात्री घायल हुए थे, जिन्हें मेडिकल कॉलेज नाहन और अन्य अस्पतालों में लाने के लिए लोगों को साढ़े तीन से चार घंटे का समय लग गया। स्थानीय लोगों के अनुसार हर वर्ष बरसात और सर्दी के मौसम में इस मार्ग पर छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं, विभाग और प्रशासन केवल अस्थायी प्रबंधन कर इतिश्री कर लेते हैं। बरसात के दिनों में सड़क पर मलबा गिरना आम बात है, जबकि सर्दियों में घना कोहरा दृश्यता शून्य कर देता है। ऐसे में बिना क्रैश बैरियर और चेतावनी बोर्डों के इस सड़क पर सफर और जोखिमभरा हो जाता है।
लोक निर्माण विभाग के अधीक्षक अभियंता अरविंद कुमार शर्मा ने माना कि संगड़ाह से हरिपुरधार तक सड़क संकरी होने के चलते दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। विभाग की ओर से बर्फबारी और पाला (कोहरा )की स्थिति को देखते हुए प्रबंधन किए जा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर रेत गिराई जाएगी। वहीं जहां स्थिति ज्यादा खराब है उन स्पॉट की मरम्मत करवाई जा रही है।
संवाद
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चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। सिरमौर जिले की ददाहू–संगड़ाह–हरिपुरधार सड़क पर सफर करना जोखिमभरा है। संगड़ाह से हरिपुरधार तक 26 किलोमीटर सड़क की हालत तो और भी गंभीर है। गहरी खाइयों के बीच बनी इस संकरी सड़क पर सुरक्षा इंतजाम न के बराबर हैं। कई जगह क्रैश बैरियर और पैरापिट न होने से हर वाहन चालक जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
दरअसल, धार्मिक पर्यटन स्थल माता भंगायणी मंदिर और चूड़धार को जिला मुख्यालय से जाने लिए वाहन चालक इस सड़क का प्रयोग करते हैं। यहां से रोजाना स्कूली बच्चे, मरीज, किसान, पर्यटक और सरकारी वाहन गुजरते हैं। सड़क कई स्थानों पर इतनी संकरी है कि दो वाहन आमने-सामने निकल ही नहीं पाते। जरा-सी चूक या ब्रेक फेल होने की स्थिति में वाहन सीधे खाई में गिर सकता है।
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बीते शुक्रवार को हरिपुरधार के पास बस हादसे में कई यात्री घायल हुए थे, जिन्हें मेडिकल कॉलेज नाहन और अन्य अस्पतालों में लाने के लिए लोगों को साढ़े तीन से चार घंटे का समय लग गया। स्थानीय लोगों के अनुसार हर वर्ष बरसात और सर्दी के मौसम में इस मार्ग पर छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं, विभाग और प्रशासन केवल अस्थायी प्रबंधन कर इतिश्री कर लेते हैं। बरसात के दिनों में सड़क पर मलबा गिरना आम बात है, जबकि सर्दियों में घना कोहरा दृश्यता शून्य कर देता है। ऐसे में बिना क्रैश बैरियर और चेतावनी बोर्डों के इस सड़क पर सफर और जोखिमभरा हो जाता है।
लोक निर्माण विभाग के अधीक्षक अभियंता अरविंद कुमार शर्मा ने माना कि संगड़ाह से हरिपुरधार तक सड़क संकरी होने के चलते दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। विभाग की ओर से बर्फबारी और पाला (कोहरा )की स्थिति को देखते हुए प्रबंधन किए जा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर रेत गिराई जाएगी। वहीं जहां स्थिति ज्यादा खराब है उन स्पॉट की मरम्मत करवाई जा रही है।
संवाद