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Sirmour News: यमुना शरद महोत्सव में पहाड़ी स्टार नाइट नहीं होने पर उठे सवाल
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यमुना शरद महोत्सव में पहाड़ी स्टार नाइट नहीं होने पर उठे सवाल
जीएस चौहान बोले- राज्य स्तरीय आयोजन में हिमाचली कलाकारों की अनदेखी, दो साल से अलग पहाड़ी संध्या नहीं होने से लोगों में नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। राज्य स्तरीय यमुना शरद महोत्सव में इस बार अलग से पहाड़ी स्टार नाइट नहीं रखे जाने पर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सालभर इस महोत्सव का इंतजार रहता है और पहले इसमें हिमाचली लोक कलाकारों के लिए अलग से स्टार नाइट आयोजित की जाती थी। उनका आरोप है कि राज्य स्तरीय दर्जा मिलने के बावजूद पहाड़ी कलाकारों को पहले जैसा मंच नहीं मिल रहा है। श्री पांवटा साहिब विकास मंच ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से हिमाचली कलाकारों को अलग संध्या देने की मांग की है।
श्री पांवटा साहिब विकास मंच के अध्यक्ष ज्ञान सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश के लोक गायक हिमाचली नाटियों के जरिये उत्तर भारत में पहचान बना रहे हैं। हिमाचल के कलाकारों को हिमाचल के अलावा उत्तराखंड, चंडीगढ़ और अन्य राज्यों में भी स्टार नाइट के लिए आमंत्रित किया जाता है। ऐसे में अपने ही प्रदेश में आयोजित राज्य स्तरीय महोत्सव में उनके लिए अलग स्टार नाइट नहीं होना निराशाजनक है।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को दिन के समय नशे और चिट्टे के खिलाफ नाट्य मंचन के जरिये जागरूकता का संदेश दिया गया, जबकि पहली सांस्कृतिक संध्या में कवि सम्मेलन प्रमुख कार्यक्रम रहा। कवियों को मंच देना सराहनीय है, लेकिन आयोजन में दर्शकों की संख्या सैकड़ों तक सीमित रहने की बात भी सामने आई है। चौहान ने प्रदेश सरकार, वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से इस विषय पर ध्यान देने तथा स्थानीय प्रशासन को हिमाचली कलाकारों के लिए अलग स्टार नाइट आयोजित करने के निर्देश देने की मांग की।
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दो साल से अलग पहाड़ी संध्या नहीं होने का दावा
गिरिपार क्षेत्र के निवासी जयपाल चौहान, प्रीति नंबरदार और एलआर कांता ने कहा कि जिले के लोगों को हर साल यमुना शरद महोत्सव का बेसब्री से इंतजार रहता है। पहले पहाड़ी स्टार नाइट में प्रदेश के बड़े लोक कलाकारों के साथ अन्य स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता था। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से अलग पहाड़ी स्टार नाइट आयोजित नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस बार रविवार की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में पंजाबी और पहाड़ी कलाकारों को एक साथ शामिल किया गया है। हिमाचली संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेजने के लिए स्थानीय कलाकारों को अलग मंच मिलना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में पहाड़ी कलाकारों के लिए अलग संध्या निर्धारित करने की मांग की।
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रविवार को हिमाचली कलाकारों को भी मिलेगा मौका : एसडीएम
एसडीएम पांवटा साहिब द्विज गोयल ने कहा कि यमुना शरद महोत्सव के आयोजन को लेकर पहले कई बैठकें की गईं और सभी पक्षों से चर्चा के बाद कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि रविवार को होने वाली अंतिम सांस्कृतिक संध्या में हिमाचली कलाकारों को भी पूरा मौका दिया जाएगा।-- -
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जीएस चौहान बोले- राज्य स्तरीय आयोजन में हिमाचली कलाकारों की अनदेखी, दो साल से अलग पहाड़ी संध्या नहीं होने से लोगों में नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। राज्य स्तरीय यमुना शरद महोत्सव में इस बार अलग से पहाड़ी स्टार नाइट नहीं रखे जाने पर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सालभर इस महोत्सव का इंतजार रहता है और पहले इसमें हिमाचली लोक कलाकारों के लिए अलग से स्टार नाइट आयोजित की जाती थी। उनका आरोप है कि राज्य स्तरीय दर्जा मिलने के बावजूद पहाड़ी कलाकारों को पहले जैसा मंच नहीं मिल रहा है। श्री पांवटा साहिब विकास मंच ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से हिमाचली कलाकारों को अलग संध्या देने की मांग की है।
श्री पांवटा साहिब विकास मंच के अध्यक्ष ज्ञान सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश के लोक गायक हिमाचली नाटियों के जरिये उत्तर भारत में पहचान बना रहे हैं। हिमाचल के कलाकारों को हिमाचल के अलावा उत्तराखंड, चंडीगढ़ और अन्य राज्यों में भी स्टार नाइट के लिए आमंत्रित किया जाता है। ऐसे में अपने ही प्रदेश में आयोजित राज्य स्तरीय महोत्सव में उनके लिए अलग स्टार नाइट नहीं होना निराशाजनक है।
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उन्होंने कहा कि शुक्रवार को दिन के समय नशे और चिट्टे के खिलाफ नाट्य मंचन के जरिये जागरूकता का संदेश दिया गया, जबकि पहली सांस्कृतिक संध्या में कवि सम्मेलन प्रमुख कार्यक्रम रहा। कवियों को मंच देना सराहनीय है, लेकिन आयोजन में दर्शकों की संख्या सैकड़ों तक सीमित रहने की बात भी सामने आई है। चौहान ने प्रदेश सरकार, वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से इस विषय पर ध्यान देने तथा स्थानीय प्रशासन को हिमाचली कलाकारों के लिए अलग स्टार नाइट आयोजित करने के निर्देश देने की मांग की।
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दो साल से अलग पहाड़ी संध्या नहीं होने का दावा
गिरिपार क्षेत्र के निवासी जयपाल चौहान, प्रीति नंबरदार और एलआर कांता ने कहा कि जिले के लोगों को हर साल यमुना शरद महोत्सव का बेसब्री से इंतजार रहता है। पहले पहाड़ी स्टार नाइट में प्रदेश के बड़े लोक कलाकारों के साथ अन्य स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता था। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से अलग पहाड़ी स्टार नाइट आयोजित नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस बार रविवार की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में पंजाबी और पहाड़ी कलाकारों को एक साथ शामिल किया गया है। हिमाचली संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेजने के लिए स्थानीय कलाकारों को अलग मंच मिलना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में पहाड़ी कलाकारों के लिए अलग संध्या निर्धारित करने की मांग की।
रविवार को हिमाचली कलाकारों को भी मिलेगा मौका : एसडीएम
एसडीएम पांवटा साहिब द्विज गोयल ने कहा कि यमुना शरद महोत्सव के आयोजन को लेकर पहले कई बैठकें की गईं और सभी पक्षों से चर्चा के बाद कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि रविवार को होने वाली अंतिम सांस्कृतिक संध्या में हिमाचली कलाकारों को भी पूरा मौका दिया जाएगा।