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Sirmour News: नाहन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग में सात पद खाली, एक एसोसिएट प्रोफेसर के सहारे ओपीडी
Mon, 19 Oct 2026 12:31 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Mon, 19 Oct 2026 12:31 AM IST
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मेडिकल कॉलेज की त्वचारोग ओपीडी में उपचार के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
ग्राउंड रिपोर्ट
मेडिकल कॉलेज में रोजाना 100 से अधिक आते हैं मरीज, उपचार के लिए घंटों इंतजार
प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, दो सीनियर और तीन जूनियर रेजीडेंट के पद खाली
मरीजों की परेशानी के साथ-साथ काम के बोझ से डॉक्टर भी हो रहे तनाव का शिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नाहन का त्वचा रोग विभाग सात पद रिक्त होने के कारण एक एसोसिएट प्रोफेसर के सहारे चल रहा है। विभाग की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सीमित चिकित्सकीय स्टाफ के चलते उन्हें जांच और परामर्श के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
मरीजों की अधिक भीड़ होने पर कुछ को बिना उपचार के ही लौटना पड़ रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच एकमात्र चिकित्सक पर विभाग की सेवाएं संभालने का अतिरिक्त दबाव है। डॉक्टरों की कमी का सीधा असर ओपीडी की व्यवस्था पर पड़ रहा है। एकमात्र चिकित्सक के अवकाश पर होने या अदालती मामलों में गवाही देने के लिए जाने की स्थिति में मरीजों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
लगातार बड़ी संख्या में मरीजों की जांच करने और विभाग की जिम्मेदारी संभालने की स्थिति उपलब्ध चिकित्सक के लिए भी चुनौती बनी हुई है। त्वचा रोग विभाग में कुल आठ पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से सात रिक्त हैं। प्रोफेसर का एक, असिस्टेंट प्रोफेसर का एक, सीनियर रेजिडेंट के दो और जूनियर रेजिडेंट के तीन पद खाली हैं। एसोसिएट प्रोफेसर के एकमात्र स्वीकृत पद पर चिकित्सक कार्यरत हैं। इस तरह विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों और रेजिडेंट की पूरी टीम उपलब्ध नहीं है। इसका असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और ओपीडी में काम के बंटवारे पर पड़ रहा है।
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अक्टूबर में तापमान में बदलाव और हवा में नमी कम होने के कारण त्वचा में रूखापन, खुजली और एक्जिमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में त्वचा की नियमित देखभाल और नमी बनाए रखना जरूरी है। इस दौरान त्वचा संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन उन्हें समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने से उनकी दिक्कतें बढ़ रही हैं। ग्राउंड रिपोर्ट वाली खबर के साथ जोड़े
सैनधार के नरेश ठाकुर ने बताया कि वह एलर्जी के चलते उपचार के लिए अस्पताल आए थे। ओपीडी में भारी भीड़ थी। करीब तीन घंटे बाद उनका नंबर लगा। उन्होंने बताया कि केवल एक चिकित्सक के चलते लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। वहीं बनेठी के सुभाष शर्मा ने बताया कि त्वचा रोग ओपीडी में अकसर मरीजों की भीड़ रहती है। वह अपने पिता को हाथों में एलर्जी की के चलते उपचार के लिए लाए थे। यहां पर उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। सरकार और विभाग को यहां पर स्टाफ की तैनाती करनी चाहिए।
कोट
त्वचा रोग विभाग में सात पद रिक्त हैं और इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। -संगीता ढिल्लो, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में रोजाना 100 से अधिक आते हैं मरीज, उपचार के लिए घंटों इंतजार
प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, दो सीनियर और तीन जूनियर रेजीडेंट के पद खाली
मरीजों की परेशानी के साथ-साथ काम के बोझ से डॉक्टर भी हो रहे तनाव का शिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नाहन का त्वचा रोग विभाग सात पद रिक्त होने के कारण एक एसोसिएट प्रोफेसर के सहारे चल रहा है। विभाग की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सीमित चिकित्सकीय स्टाफ के चलते उन्हें जांच और परामर्श के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
मरीजों की अधिक भीड़ होने पर कुछ को बिना उपचार के ही लौटना पड़ रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच एकमात्र चिकित्सक पर विभाग की सेवाएं संभालने का अतिरिक्त दबाव है। डॉक्टरों की कमी का सीधा असर ओपीडी की व्यवस्था पर पड़ रहा है। एकमात्र चिकित्सक के अवकाश पर होने या अदालती मामलों में गवाही देने के लिए जाने की स्थिति में मरीजों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
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लगातार बड़ी संख्या में मरीजों की जांच करने और विभाग की जिम्मेदारी संभालने की स्थिति उपलब्ध चिकित्सक के लिए भी चुनौती बनी हुई है। त्वचा रोग विभाग में कुल आठ पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से सात रिक्त हैं। प्रोफेसर का एक, असिस्टेंट प्रोफेसर का एक, सीनियर रेजिडेंट के दो और जूनियर रेजिडेंट के तीन पद खाली हैं। एसोसिएट प्रोफेसर के एकमात्र स्वीकृत पद पर चिकित्सक कार्यरत हैं। इस तरह विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों और रेजिडेंट की पूरी टीम उपलब्ध नहीं है। इसका असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और ओपीडी में काम के बंटवारे पर पड़ रहा है।
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अक्टूबर में तापमान में बदलाव और हवा में नमी कम होने के कारण त्वचा में रूखापन, खुजली और एक्जिमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में त्वचा की नियमित देखभाल और नमी बनाए रखना जरूरी है। इस दौरान त्वचा संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन उन्हें समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने से उनकी दिक्कतें बढ़ रही हैं। ग्राउंड रिपोर्ट वाली खबर के साथ जोड़े
सैनधार के नरेश ठाकुर ने बताया कि वह एलर्जी के चलते उपचार के लिए अस्पताल आए थे। ओपीडी में भारी भीड़ थी। करीब तीन घंटे बाद उनका नंबर लगा। उन्होंने बताया कि केवल एक चिकित्सक के चलते लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। वहीं बनेठी के सुभाष शर्मा ने बताया कि त्वचा रोग ओपीडी में अकसर मरीजों की भीड़ रहती है। वह अपने पिता को हाथों में एलर्जी की के चलते उपचार के लिए लाए थे। यहां पर उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। सरकार और विभाग को यहां पर स्टाफ की तैनाती करनी चाहिए।
कोट
त्वचा रोग विभाग में सात पद रिक्त हैं और इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। -संगीता ढिल्लो, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज