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Sirmour News: परिवार न्यायालय ने बालिग होने पर आवेदक को 4.01 लाख रुपये जारी करने के दिए आदेश
Mon, 19 Oct 2026 01:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Mon, 19 Oct 2026 01:04 AM IST
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अदालत-1
लोक अदालत में तलाक के मामले के दौरान जमा राशि अब ब्याज सहित मिलेगी, मां ने भी दी सहमति
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। नाहन स्थित प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ने बालिग हो चुके आवेदक के पक्ष में आदेश जारी करते हुए 4,01,000 रुपये की जमा राशि उसके हिस्से के अनुसार अद्यतन ब्याज सहित जारी करने के निर्देश दिए हैं। यह राशि वर्ष 2009 में लोक अदालत में निपटाए गए तलाक के एक मामले से संबंधित है।
प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के न्यायाधीश अजय मेहता ने यह आदेश पारित किया। न्यायालय में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(बी) के तहत दायर मामले सुमित बंसल बनाम अनुपमा में जमा राशि जारी करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया था। मामले का निपटारा 19 दिसंबर, 2009 को लोक अदालत में हुआ था। उस समय आवेदक नाबालिग था।आवेदन पर प्रतिवादी नंबर-2, आवेदक की मां, ने राशि जारी करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उनका बयान दर्ज कर न्यायालय की फाइल में रखा गया। वहीं, सिविल नाजिर की रिपोर्ट के अनुसार, 4,01,000 रुपये की अवितरित राशि नाहन डाकघर में किसान विकास पत्र (केवीपी) के रूप में जमा थी।
न्यायालय ने 19 दिसंबर, 2009 के आदेश के अनुरूप आवेदक का हिस्सा अद्यतन ब्याज सहित जारी करने के निर्देश दिए। उचित पहचान और सत्यापन के बाद रिफंड वाउचर जारी किया जाएगा और राशि सीधे आवेदक के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी।
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लोक अदालत में तलाक के मामले के दौरान जमा राशि अब ब्याज सहित मिलेगी, मां ने भी दी सहमति
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। नाहन स्थित प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ने बालिग हो चुके आवेदक के पक्ष में आदेश जारी करते हुए 4,01,000 रुपये की जमा राशि उसके हिस्से के अनुसार अद्यतन ब्याज सहित जारी करने के निर्देश दिए हैं। यह राशि वर्ष 2009 में लोक अदालत में निपटाए गए तलाक के एक मामले से संबंधित है।
प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के न्यायाधीश अजय मेहता ने यह आदेश पारित किया। न्यायालय में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(बी) के तहत दायर मामले सुमित बंसल बनाम अनुपमा में जमा राशि जारी करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया था। मामले का निपटारा 19 दिसंबर, 2009 को लोक अदालत में हुआ था। उस समय आवेदक नाबालिग था।आवेदन पर प्रतिवादी नंबर-2, आवेदक की मां, ने राशि जारी करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उनका बयान दर्ज कर न्यायालय की फाइल में रखा गया। वहीं, सिविल नाजिर की रिपोर्ट के अनुसार, 4,01,000 रुपये की अवितरित राशि नाहन डाकघर में किसान विकास पत्र (केवीपी) के रूप में जमा थी।
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न्यायालय ने 19 दिसंबर, 2009 के आदेश के अनुरूप आवेदक का हिस्सा अद्यतन ब्याज सहित जारी करने के निर्देश दिए। उचित पहचान और सत्यापन के बाद रिफंड वाउचर जारी किया जाएगा और राशि सीधे आवेदक के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी।
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