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Sirmour News: सात वर्ष पुराने मंदिर चोरी मामले में दोषी को भुगतनी होगी 3 वर्ष की सजा
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वर्ष 2019 में पांवटा साहिब का मामला, आरोपी पर गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियां सहित घंटियां चोरी के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
करीब सात साल पहले शिव मंदिर से मूर्तियां और घंटियां चोरी करने के मामले में आरोपी को सजा भुगतनी होगी। न्यायाधीश कपिल शर्मा ने मामले में दोषी विकास की आपराधिक अपील खारिज करते हुए उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने मई 2025 को ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई तीन वर्ष के कारावास और 8,000 जुर्माना की सजा को पूरी तरह बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया है।
मामला वर्ष 2019 को पांवटा साहिब थाना में पंजीकृत है। शिव मंदिर, कुंजा मटरालियों के पुजारी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि रात में मंदिर का ताला तोड़कर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की दो मूर्तियां तथा दो पीतल की घंटियां चोरी कर ली गई थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपी विकास को चोरी के कुछ ही घंटों बाद मूर्तियां और घंटियां कबाड़ी को बेचने की कोशिश करते हुए स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी का सामान बरामद किया। अदालत ने माना कि आरोपी चोरी के तुरंत बाद चोरीशुदा सामान के साथ पकड़ा गया और उसके पास इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं था।
अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। हालांकि अदालत ने कहा कि चोरी के तुरंत बाद आरोपी के कब्जे से चोरी का सामान बरामद होना और गवाहों के सुसंगत बयान अभियोजन के पक्ष को मजबूत करते हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। ऐसे में अदालत ने साल 2024 को ट्रायल कोर्ट (अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) की सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को उचित ठहराया है।-- -- -- --
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
करीब सात साल पहले शिव मंदिर से मूर्तियां और घंटियां चोरी करने के मामले में आरोपी को सजा भुगतनी होगी। न्यायाधीश कपिल शर्मा ने मामले में दोषी विकास की आपराधिक अपील खारिज करते हुए उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने मई 2025 को ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई तीन वर्ष के कारावास और 8,000 जुर्माना की सजा को पूरी तरह बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया है।
मामला वर्ष 2019 को पांवटा साहिब थाना में पंजीकृत है। शिव मंदिर, कुंजा मटरालियों के पुजारी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि रात में मंदिर का ताला तोड़कर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की दो मूर्तियां तथा दो पीतल की घंटियां चोरी कर ली गई थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपी विकास को चोरी के कुछ ही घंटों बाद मूर्तियां और घंटियां कबाड़ी को बेचने की कोशिश करते हुए स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी का सामान बरामद किया। अदालत ने माना कि आरोपी चोरी के तुरंत बाद चोरीशुदा सामान के साथ पकड़ा गया और उसके पास इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं था।
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अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। हालांकि अदालत ने कहा कि चोरी के तुरंत बाद आरोपी के कब्जे से चोरी का सामान बरामद होना और गवाहों के सुसंगत बयान अभियोजन के पक्ष को मजबूत करते हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। ऐसे में अदालत ने साल 2024 को ट्रायल कोर्ट (अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) की सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को उचित ठहराया है।
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