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बघाट बैंक मामला: गलत लोन देने की स्वतंत्र एजेंसी से करवाएं ऑडिट

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 01:21 AM IST
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Baghat Bank case: Independent agency should audit wrong loan disbursements
बघाट बैंक की एजीएम में मौजूद डेलीगेट्स। स्रोत बैंक प्रबंधक
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वार्षिक साधारण सभा में बोले डेलीगेट्स,दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
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बैंक को रिवाइवल करने के लिए भी प्रबंधकों को प्रयास करने को कहा

बैंक प्रबंधक बोले दोषियों का बख्शा नहीं जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बघाट बैंक में गलत लोन देने के मामले में स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट करवाने की मांग सभी शेयर होल्डरों के प्रतिनिधियों (डेलीगेट्स) ने उठाई। उन्होंने कहा कि बैंक प्रबंधक तुरंत स्वतंत्र एजेंसी से इसकी जांच करवाएं और इसमें जो भी दोषी हैं, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई करें। सोमवार को बैंक के चेयरमैन अरुण शर्मा की अध्यक्षता में सोलन में हुई बघाट बैंक की वार्षिक साधारण सभा (एजीएम) पहुंचे डेलीगेट्स ने कई मुद्दों पर अपनी राय दी। इस दौरान डेलीगेट्स ने गलत तरीके से दिए लोन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बैंक प्रबंधकों को क्या आठ साल में यह पता नहीं चल पाया कि गलत तरीके से लोन देने का दोषी कौन है। यदि पता है तो उन पर कार्रवाई करने से बैंक प्रबंधक पीछे क्यों हट रहा है। बैठक में कई बार माहौल गर्म भी हो गया और डेलीगेट्स ने प्रबंधकों से तीखे सवाल जवाब किए। हालांकि बैंक प्रबंधकों ने कहा कि गलत लोन देने को लेकर बैंक की ओर से फैक्ट एंड फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। वह भी इस पर जांच कर रही है। हालांकि बैंक का पहला कार्य लोन रिकवरी का है, जिस पर पूरा फोकस किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा। उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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रिवाइबल की तरफ किया जाए प्रयास
डेलीगेट्स ने कहा कि बैंक की प्राथमिकता रिवाइबल की तरफ होनी चाहिए। इसके लिए डिफाल्टरों से रिकवरी करें। उन पर दबाव बनाएं ताकि बैंक दोबारा से रिवाइबल हो जाए। इसके लिए लोगों से शेयर खरीदने की भी अपील करें। बैंक के ज्यादा से ज्यादा शेयर बेचें ताकि बैंक को रिवाइबल होने में कोई परेशानी न आए। इसके लिए सभी डेलीगेट्स एकजुट दिखे। हालांकि इस दौरान चेयरमैन ने बताया कि अब तक बैंक की ओर से करीब 3,000 लोगों को बीमे का पैसा मिल चुका है। 4,300 लोगों की फाइलें भेज दी गई हैं, जिन्हें जल्द पैसा मिल जाएगा। चेयरमैन ने बताया कि इसे लेकर सरकार से भी आग्रह किया जा रहा है कि वह 30 से 35 करोड़ रुपये अगर उन्हें दे देते हैं तो उनका एनपीए कम हो जाएगा।
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मर्ज की जरूरत पड़ी तो भी पीछे न हटें
डेलीगेट्स ने यह भी सुझाव दिया कि यदि बैंक को मर्ज करने की जरूरत पड़ती है तो भी इसके लिए बैंक प्रबंधक पीछे न हटें और इसे किसी अच्छे बैंक में मर्ज करें। हालांकि बैंक प्रबंधकों ने बताया कि यह रिजर्व बैंक ही तय करेगा कि उन्हें कौन से बैंक में मर्ज करना है। इसके लिए वह बैंक को एक प्रस्ताव भी भेजेंगे। इसमें पहले तो बैंक के रिवाइबल की ऑप्शन होगी। वहीं अगर ऐसा नहीं होता है तो वह स्टेट को ऑपरेटिव बैंक या कांगड़ा सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक में मर्ज होने के लिए आरबीआई को लिखेंगे।

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घाट में चल रही ब्रांचों को बंद करने पर भी सहमति
बैठक के दौरान बैंक की ब्रांचों का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया गया। इस दौरान डेलीगेट्स ने यह भी सुझाव दिया कि वह घाटे में चल रही बैंक की ब्रांचों को बंद करने से भी गुरेज न करें। इसमें नाहन, ऊना व कांगड़ा ब्रांच पर चर्चा हुई। हालांकि नाहन ब्रांच अभी ठीक चल रही है। मगर ऊना व कांगड़ा ब्रांच कुछ घाटे में है। ऐसे में बैंक प्रबंधक इन्हें बंद करने पर निर्णय ले सकता है।

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बैठक में कम सदस्य पहुंचे
दो साल बाद हुई इस बैठक में कम डेलीगेट्स पहुंचे। जब बैंक का कोरम पूरा नहीं हुआ तो उन्होंने शुरू में आधे घंटे के लिए बैठक को स्थगित कर दिया। हालांकि आधे घंटे बाद फिर दोबारा से बैठक शुरू हुई, जिसमें फिर कोरम पूरा किया गया। इसके बाद फिर चर्चा हुई। बैंक ने करीब 399 सदस्यों को बुलाया था, मगर उसमें सात दर्जन के करीब सदस्य ही पहुंचे थे। हालांकि बैंक प्रबंधकों ने कहा कि सदस्य को उन पर विश्वास है, इसलिए वह बैठक में नहीं पहुंचे।

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बघाट बैंक की एजीएम मंगलवार को हुई। इसमें सभी डेलीगेट्स ने बैंक को रिवाइबल करने के लिए कहा, जिस पर बैंक प्रयासरत है। इसके अलावा अगर मर्ज की जरूरत पड़ती है तो भी सहमति बनी है, इसे लेकर भी आरबीआई को एक प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहीं बैंक में लोन देने के दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठी है, इसे लेकर भी प्रबंधक जांच कर रहा है, दोषियों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा। बैंक जल्द रिवाइव करेगा।
-अरुण शर्मा, चेयरमैन बघाट बैंक सोलन
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