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हिमाचल: सहारा योजना में मरीज बेसहारा, 10 माह से नहीं मिली 3-3 हजार की मदद; 36,000 पीड़ित हो रहे परेशान

आदित्य सोफत, सोलन। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 27 Apr 2026 11:49 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश में सहारा योजना में लाभार्थियों को जुलाई 2025 से राहत राशि नहीं मिली है। उपचार के लिए भी मरीज अब जेब से पूरा पैसा खर्च कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Patients Left Stranded Under Sahara Scheme Aid of ₹3,000 Each Pending for 10 Months
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

प्रदेशभर में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को राहत देने वाली सहारा योजना में पैसे आना बंद हो गए हैं। योजना के लाभार्थियों को जुलाई 2025 से राहत राशि नहीं मिली है। इस योजना में सरकार की ओर से प्रति माह 3,000 रुपये मरीजों को राहत राशि दी जाती है। इस वित्तीय मदद के बंद होने के बाद मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ भी बढ़ गया है। उपचार के लिए भी मरीज अब जेब से पूरा पैसा खर्च कर रहे हैं।

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सहारा योजना का पैसा न आने पर स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल के पास भी शिकायतें पहुंची हैं। इससे पहले राहत राशि मिलने से मरीजों को कुछ ही रुपये खर्च करने पड़ते थे। महंगे दामों पर मिलने वाले इंजेक्शन और दवाइयों के खरीदने से मरीज आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। प्रदेशभर में सहारा योजना में करीब 36,000 लाभार्थी शामिल हैं। सरकार की ओर से पीड़ितों के खाते में सीधे पैसे डाले जाते हैं, लेकिन लाभार्थी करीब दस माह से मदद के इंतजार में बैठे हुए हैं।
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वहीं, पीड़ित अस्पताल में सहारा योजना की जानकारी लेने के लिए कोऑर्डिनेटर और विभाग के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। परंतु कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। केवल उन्हें बजट न आने के बारे में बताकर वापस भेज रहे है। इसके बाद लाभार्थियों को निराश होकर लौटना पड़ता है। योजना में वित्तीय मदद न मिलने के कारण गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को इलाज करवाने में परेशानी हो रही है। 

इसलिए चलाई सहारा योजना, इन्हें किया है शामिल
सरकार की ओर से गंभीर बीमारियों में राहत देने के लिए सहारा योजना चलाई गई है। इसमें कैंसर, लकवा, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, क्रोनिक रीनल फेल्योर जैसी बीमारियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कई दिव्यांग भी योजना का लाभ ले रहे हैं। इससे बीमारी का लाभ उपचार में खर्च और पालन-पोषण के लिए आता है, लेकिन समस्या आ गई है। ऐसी गंभीर बीमारियां जो मरीजों को आर्थिक तौर कमजोर कर देती हैं। बीमारी के उपचार में कोई दिक्कत न आए, ऐसे में पीड़ित मरीजों को सामाजिक सुरक्षा उपाय के रूप में वित्तीय सहायता देना है, जिससे लंबे समय तक इलाज के दौरान होने वाली कठिनाइयों को कुछ हद तक कम किया जा सके। सरकार की ओर से यह पैसा इसलिए जारी किया जाता है।

जल्द ही लाभार्थियों को राहत राशि दी जाएगी
सहारा योजना को एक मई से चरणबद्ध तरीके में लाया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से फंड न मिलने से काफी दिक्कत आई है। जल्द ही सहारा योजना के लाभार्थियों को राहत राशि दी जाएगी। आगामी दिनों में परेशान नहीं होना पड़ेगा। कई बार लाभार्थियों के कागजात देरी से पहुंचने पर भी योजना का पैसा खाते में नहीं जाता है। -कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल स्वास्थ्य मंत्री

नहीं जांची पात्रता, कई  निजी अस्पतालों ने खुद ही बना दिए हिमकेयर कार्ड
हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर योजना में हुए घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई निजी अस्पतालों ने नियमों को दरकिनार करते हुए खुद ही लोगों के हिमकेयर कार्ड बना दिए और योजना का दुरुपयोग किया। मरीजों के ऑपरेशन में जो सामान लगना था, इससे कई गुना ज्यादा सामान का बिल बना दिया। कई ऐसे लोगों के भी हिमकेयर कार्ड बनाए गए, जो सरकारी नौकरी में हैं। इस मामले में अब तक 35 निजी अस्पताल जांच के दायरे में है। विजिलेंस अब निजी अस्पतालों का रिकॉर्ड सरकारी के साथ मिलान करेगा।

विजिलेंस ने सरकारी रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया है। अब निजी अस्पताल प्रबंधन को अपना रिकॉर्ड विजिलेंस कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। हिमकेयर घोटाले की जांच के लिए 8 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। विजिलेंस ने दो टीमें बनाई हैं। एक टीम रिकाॅर्ड की जांच करेगी और दूसरी दस्तावेज जुटाने और अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ करेगी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिन लोगों के हिमकेयर कार्ड बनाए गए, अस्पताल प्रबंधन ने उनकी पात्रता की सही जांच नहीं की है। कई लोग ऐसे भी, जिनके ऑपरेशन नहीं हुए और बिल बनाकर सरकार से पैसा वसूल कर लिया। कई मामलों में ऐसे मरीजों के नाम पर भी क्लेम उठाए गए, जिन्हें वास्तव में अस्पताल में भर्ती ही नहीं किया गया था। इस गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद सरकार और विजिलेंस विभाग हरकत में आ गया है। विजिलेंस ने मामले की जांच तेज करते हुए संबंधित अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों को बारी-बारी से अपने कार्यालय में तलब करना शुरू कर दिया है। 
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